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ग्रेजुएशन पास युवक-युवतियों ने खोल रखे थे फर्जी कॉल सेंटर, छापेमारी में हुआ भंडाफोड़

Nilmani Pal
2 Aug 2025 7:42 AM IST
ग्रेजुएशन पास युवक-युवतियों ने खोल रखे थे फर्जी कॉल सेंटर, छापेमारी में हुआ भंडाफोड़
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यूपी। नोएडा पुलिस ने शहर के सेक्टर-65 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का शुक्रवार को पर्दाफाश कर सरगना समेत 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी कंप्यूटर में आए वायरस को तकनीकी सहायता से दूर करने का झांसा देकर अमेरिकी नागरिकों को ठगते थे। उन्होंने एक हजार से अधिक लोगों से ठगी की। डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि बीते दिनों मिली सूचना के आधार पर जानकारी जुटाकर फेज-3 थाने की टीम और सीआरटी ने कॉल सेंटर पर छापेमारी की। उस समय आरोपी विदेशी नागरिकों के साथ ठगी कर रहे थे। मौके से गैंग के सरगना ध्रुव अरोड़ा, आकाश तिवारी, आकाश कुमार, तरुण कुमार, मयूर नायक, गुरविंदर सिंह, मयवो, सौरभ चंद्रा, प्रत्युमन शर्मा, गौरव जसरोटिया, कुनाल राजवंशी, दिव्यांश भडाला, अपूर्व सिंह, मोहम्मद फैजुल, अस्मीत सिंह, हरमन प्रीत सिंह, रितु राजपूत और सुकृति सिंह को गिरफ्तार किया गया। ज्यादातर आरोपी दिल्ली और हरियाणा के रहने वाले हैं।

सरगना ध्रुव गूगल समेत अन्य प्लैटफॉर्म और डार्क वेब के जरिये विदेशी नागरिकों का डेटा हासिल करता था। इसके बाद चिह्नित अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर में वायरस या बग भेजा जाता था। तकनीकी सहायता के नाम पर एक फर्जी हेल्पलाइन नंबर भी देते थे। जब ईमेल और लिंक बार-बार विदेशी नागरिकों को दिखाई देता था तो इससे परेशान होकर वो हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करते थे और जाल में फंस जाते। आरोपी एक्स लाइट और आईबीम ऐप के माध्यम से इंटरनेट कॉल कर तकनीकी सहायता देकर कंप्यूटर में आई समस्या को दूर करने का झांसा देते थे। सहायता के नाम पर 100 से एक हजार डॉलर तक की मांग की जाती थी। वायरस आने की बात सुनकर जब विदेशी नागरिक अपनी डिटेल चेक करते तो आरोपी उसका स्क्रनीशॉट लेकर अपने पास रख लेते थे। इसमें खाते और बैंक संबंधी जानकारी भी होती थी। इसके बाद रकम वसूलते थे।

सरगना ध्रुव की उम्र 26 साल है और उसने प्रोग्रामिंग में बीए किया है। आकाश ने एलएलबी, तरुण ने बीकॉम तो प्रत्युमन ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया है। पकड़े गए ज्यादातर आरोपी स्नातक हैं। आरोपियों से 23 लैपटॉप, 23 हैंडसेट, 23 माउस, 27 लैपटॉप चार्जर, 17 मोबाइल, एक पेनड्राइव और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। एक अन्य सरगना समीर फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसीपी वर्णिका सिंह की अगुवाई में टीम गठित की गई है।

गैंग के सरगना ने 50 हजार रुपये महीने पर किराये में मकान लिया और कॉल सेंटर खोल दिया। पिछले छह महीने से यहीं से लोगों के साथ ठगी हो रही थी। गैंग का सरगना और उसके कुछ अन्य साथी पूर्व में भी दिल्ली में जेल जा चुके हैं। वे करीब छह सालों से देश के अलग-अलग हिस्से में कॉल सेंटर संचालित कर विदेशी नागरिकों के साथ ठगी कर रहे। जेल से बाहर आने के बाद गैंग का सरगना फिर से ठगी शुरू कर दी। आरोपी तकनीकी सहायता के नाम पर विदेशी नागरिकों से डॉलर, गिफ्ट कूपन और क्रिप्टो करेंसी मंगवाते थे। इनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आने की संभावना है। दरअसल, इन आरोपियों ने कई विदेशी खातों को किराये पर ले रखा है। इन किराये के अकाउंट में डॉलर में रकम भेजी जाती है। नौकरी पर रखने से पहले सभी को अमेरिकी नागरिकों की तरह अंग्रेजी बोलने की ट्रेनिंग भी दी गई थी। इससे अमेरिकी नागरिक को पता नहीं चल पाता था कि कॉल करने वाला भारतीय है या अमेरिकी।


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