गोल्ड प्रोसेसिंग प्लांट का आज हो रहा उद्घाटन, प्रतिदिन 1 किलो सोना निकालने का दावा

आंध्रप्रदेश। खनन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। कुरनूल जिले की जोन्नागिरी खदान में व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू होने वाला है। बुधवार को मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस गोल्ड प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन करेंगे।
कुरनूल जिले के तुग्गली मंडल स्थित जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट से सोने के उत्पादन का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। लगभग 20 साल की प्लानिंग के बाद राज्य की मिट्टी से सोना निकालने का सपना साकार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू बुधवार को इस गोल्ड प्रोसेसिंग प्लांट का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही वह इसी क्षेत्र में सोने के अयस्क (Gold ore) की रिफाइनिंग की दूसरी यूनिट की आधारशिला भी रखेंगे।
इस प्रोजेक्ट से फिलहाल सालाना 4 लाख टन अयस्क खनन की योजना है। शुरुआत में प्लांट से प्रतिदिन करीब 1 किलोग्राम सोने का उत्पादन होगा। धीरे-धीरे इस क्षमता को बढ़ाकर 600 किलोग्राम सालाना किया जाएगा, जबकि अंतिम लक्ष्य हर साल 1,500 किलोग्राम सोने का उत्पादन करना है। जोन्नागिरी खदान में ट्रायल प्रोडक्शन पहले ही सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अब उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए जोन्नागिरी के आसपास 1,200 एकड़ में खनन गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। जोन्नागिरी क्षेत्र में सोने के भंडार की पहचान काफी दिलचस्प तरीके से हुई थी। यहां अक्सर हीरे मिलने की खबरों के बाद भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने विस्तृत सर्वे शुरू किया था। लगभग तीन दशकों तक चले व्यापक भूवैज्ञानिक अध्ययन के बाद जोन्नागिरी, एरागुडी और पगिरिडायी गांवों में व्यावसायिक रूप से सोना निकालने की पुष्टि हुई थी।
साल 2006 में 'जियोमायसोर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' ने 1,477.24 एकड़ क्षेत्र में खनन अधिकार हासिल किए थे। इसके बाद प्रायोगिक खनन में अयस्क की उच्च गुणवत्ता की पुष्टि हुई। कंपनी ने अत्याधुनिक गोल्ड प्रोसेसिंग फैसिलिटी बनाने के लिए 320 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस खनन और प्रसंस्करण कार्य में लगभग 800 कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में प्रशासनिक बाधाओं के कारण इस प्रोजेक्ट में काफी देरी हुई। हालांकि, मौजूदा गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद लंबित मंजूरियों और बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों में तेजी लाई गई, जिससे यह प्रोजेक्ट आखिरकार उत्पादन के चरण तक पहुंच सका।





