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Delhi दिल्ली। डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत पर एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जेनजी को अपने भविष्य से मतलब है। उन्होंने छात्रों के मुद्दों को उठाते हुए सस्ती राजनीति करने वालों को खारिज कर दिया है। एनसीपी नेता ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय लंबे समय से एक तरह से विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए एक अप्रत्यक्ष मंच रहा है। यहां एनएसयूआई, एबीवीपी और कम्युनिस्ट संगठनों के छात्र चुनाव लड़ते हैं, इसलिए छात्रों ने जिसे भी चुना है और जिन्हें अपने प्रतिनिधियों के रूप में भेजा है, वह अपने आप में एक संकेत है कि छात्रों को इन सभी अन्य मुद्दों में कोई दिलचस्पी नहीं है, जिन पर चर्चा की जा रही है।
उन्होंने सीधे तौर पर तो नाम नहीं लिया, लेकिन उनका निशाना लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी थे, जो छात्रों को लेकर इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर रहे थे। एनसीपी नेता ने कहा कि छात्रों की परीक्षा से जुड़ा एक मुद्दा था, जिसे सरकार ने संज्ञान लिया। हमारे एक मंत्री तक ने छात्रों के हित को देखते हुए इस्तीफा दिया, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता होने पर इसका असर छात्रों और उनके अभिभावकों पर पड़ता है और उनके भविष्य पर असर पड़ता है। सरकार ने परीक्षा पेपर लीक को लेकर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। डूसू चुनाव के परिणाम ने दिखाया है कि जेनजी को सस्ती राजनीति से मतलब नहीं है, उन्हें भविष्य से फर्क पड़ता है।
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हर फैसले और हर सोच के मूल में छात्र और युवा ही केंद्र में रहे हैं। विपक्ष के नेता हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों का फायदा उठाने और उनसे राजनीतिक लाभ लेने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर चाहे पहले की बात हो या अभी की, केंद्र सरकार हो या बिहार सरकार, छात्र और युवा हमेशा केंद्र में ही रहे हैं। जिसका परिणाम डूसू चुनाव में देखने को मिला। बिहार के मंत्री संजय सिंह ने भी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का आभार जताया और एबीवीपी को शुभकामनाएं दीं।
दूसरी ओर, डूसू चुनाव के नतीजों पर कांग्रेस चंडीगढ़ के अध्यक्ष एचएस लकी ने कहा कि भाजपा की आदत है कि वे अपनी छोटी जीतों को भी बड़ी जीत की तरह दिखाते हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी में सेक्रेटरी हमारे एनएसयूआई-समर्थित पैनल से थे और उसे सबसे ज्यादा वोट मिले। दिल्ली में भी जो वाइस प्रेसिडेंट जीता, वह एनएसयूआई का बागी था। उस समय पार्टी उसे किसी और पद के लिए खड़ा करना चाहती थी, और कुछ नाराजगी की वजह से उसने वहां से चुनाव लड़ा और सबसे ज्यादा वोट हासिल किए। इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों में गढ़वाल यूनिवर्सिटी और तीन-चार दूसरी यूनिवर्सिटीज में भी चुनाव हुए, और एनएसयूआई हर जगह जीती है, लेकिन भाजपा और एबीवीपी यह नहीं दिखाएंगे। वे सिर्फ वही चीजें दिखाएंगे जो उन्हें अपने फायदे की लगती हैं और वे चीजें नहीं दिखाएंगे जो उनके खिलाफ जाती हैं।
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