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भगवाहन मोहल्ले को चमकाएंगे गगन

Shantanu Roy
17 May 2026 5:50 PM IST
भगवाहन मोहल्ले को चमकाएंगे गगन
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Bhagvahan Neighborhood. भगवाहन मुहल्ला। मंडी नगर परिषद आज नगर निगम होकर अपने चुनाव के दूसरे पड़ाव पर खड़ी है। इस बीच दस सालों के बाद मतदाता के हाथ उस गगन को चुनने का अवसर आया है, जिसके पार्षद रहते मुहल्ला सदा चकाचक रहता था और गलियां कभी बदबू तक नहीं मारती थीं। मंडी नगर निगम में चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्हों पर हो रहे हैं और गगन कश्यप को भाजपा ने पहली बार अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर चुनाव मैदान में कमल खिलाने के लिए उतारा है। मंडी शहर के लिए गगन कश्यप कोई अजनबी नही हैं। मंडी नगर परिषद में गगन भगवाहन मोहल्ला वार्ड से पार्षद भी रहे। इसी वार्ड के मतदाता के सहयोग से नगर परिषद उपाध्यक्ष पद के लिए सीधे करवाए गए चुनाव के दौरान 13 वार्डों के मतदाताओं ने भी गगन को ही चुना था। इस बीच आरक्षण रोस्टर की मार और अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद पर सीधे चुनाव करवाने की प्रथा बंद हुई तो गगन कश्यप चुनावी रण से दूर हो गए। आरक्षण की जद में वार्ड आया तो फिर गगन ने संयम रखा। नगर परिषद की सत्ता से बेदखल होने के बाद ना कहीं से चुनाव लड़ा और ना ही पार्टी से कोई बगावत की। इस बीच जिसने भी सहयोग मांगा उसको तन मन और धन से सहयोग बिना किसी
लालसा के किया।

शहर के लोगों सहित भगवाहन मोहल्ला वार्ड के लोगों की दिक्कतें और निजी काम निपटाने में लगे रहे। गगन पेशे से वकील हैं और मंडी के ही स्थायी निवासी हैं। ऐसे में शहर के लोगों की दिक्कतों को जानते भी हैं और उनको निपटाने के दांव पेंच भी उन्हें आते हैं। मंडी नगर परिषद से नगर निगम बन गई और तब जाकर गगन कश्यप को भाजपा ने चुनाव मैदान में आने का मौका दिया। इस मर्तबा गगन कश्यप को चुनने का ही मौका भी मिला है और वार्ड को आर्दश बनाने की रूपरेखा संवारने का भी अवसर मिला है। ऐसे में अब फैसला मतदाता को लेना है कि क्या गगन कश्यप जैसा व्यक्ति पार्षद बनाना है या फिर से अगले पांच सालों तक मूलभूत सुविधाओं को तरसते हुए बिताने हैं। गगन कश्यप नगर परिषद में उपाध्यक्ष रहते ही आरक्षण रोस्टर के कारण चुनावी दंगल से दूर हुए थे। जानकार यही बताते हैं कि गगन के रहते वार्ड में दिन के भीतर दो बार झाडू लगाया जाता था। वार्ड के किसी भी हिस्से से गंदगी नहीं रिसती थी और ना ही सीवरेज चेंबर लीक होकर बदबू मारते थे। गगन कश्यप के रहते वार्ड के भीतर कभी अंधेरा पसरा ही नहीं है। रास्ते और नालियां कभी टूटी फूटी दिखाई दी ही नहीं है।
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