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धान खरीदी घोटाले में पांच आरोपी अभी भी फरार, पुलिस ने इनाम बढ़ाकर किया 20 हजार

Shantanu Roy
19 Sept 2025 8:30 PM IST
धान खरीदी घोटाले में पांच आरोपी अभी भी फरार, पुलिस ने इनाम बढ़ाकर किया 20 हजार
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जल्द होगा बड़ा खुलासा
Gwalior. ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में सामने आए धान खरीदी घोटाले के आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इस घोटाले में किसानों से धान खरीदकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। पुलिस ने पहले आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसके बाद एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी। लेकिन शेष आरोपी अब भी फरार हैं। इस बीच, ग्वालियर पुलिस ने आरोपियों पर घोषित इनामी राशि को बढ़ाकर अब 20-20 हजार रुपये कर दिया है।
करोड़ों की धोखाधड़ी, किसान हुए परेशान
ग्वालियर कृषि उपज मंडी लश्कर में हाल ही में यह बड़ा घोटाला सामने आया था। आरोपियों ने किसानों से धान खरीदकर न केवल भुगतान टाला, बल्कि डबरा स्थित एक वेयरहाउस में रखे गए धान पर करोड़ों रुपये का बैंक लोन भी ले लिया। किसानों को न तो उनका पैसा मिला और न ही धान वापस हुआ। इस धोखाधड़ी से क्षेत्र के सैकड़ों किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
DIG ने बढ़ाया इनाम
ग्वालियर के उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) अमित सांघी ने फरार पांचों आरोपियों पर इनामी राशि बढ़ाने का आदेश जारी किया है। अब इन आरोपियों की गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। DIG ने कहा कि जो भी व्यक्ति विधिसंगत तरीके से आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करेगा, उसे यह नगद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
इन आरोपियों की तलाश तेज
उप पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय ग्वालियर रेंज से मिली जानकारी के मुताबिक फरार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
भूपेन्द्र किरार निवासी इमली नाका सिकंदर कम्पू
महेश कौशल निवासी पंचशील नगर, मेला मैदान के पीछे
अमित गुप्ता निवासी वार्ड-18, पकोड़िया महादेव दतिया
सुचि गुप्ता निवासी एकता विहार कॉलोनी, गुढ़ा कम्पू
कदम सिंह जाटव निवासी जगजीवन नगर, 60 फुटा रोड, कुम्हरपुरा
इन सभी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस ने इनके ठिकानों पर दबिश बढ़ा दी है, लेकिन आरोपी लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार हैं।
ग्वालियर मंडी का सबसे बड़ा घोटाला
जानकारों के मुताबिक यह ग्वालियर मंडी में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है। व्यापारियों और मंडी स्टाफ की मिलीभगत से किसानों से धान खरीदा गया और उसके बाद भुगतान नहीं किया गया। इसके साथ ही वेयरहाउस में जमा धान को गिरवी रखकर बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन ले लिया गया। यह पूरा खेल कई महीनों तक चलता रहा, लेकिन जब किसानों को भुगतान नहीं मिला तो उन्होंने आवाज उठानी शुरू की।
कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए किसानों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद मंडी प्रबंधन ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और एक आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन पांच आरोपी अब तक फरार हैं।
किसानों का दर्द
धान खरीदी घोटाले का सबसे बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। जिन किसानों ने अपनी साल भर की मेहनत की फसल मंडी में बेची थी, वे अब तक अपने पैसों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन फसल बेचने के बाद भी उन्हें भुगतान नहीं मिला। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है।
पुलिस की सख्ती
DIG अमित सांघी ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही फरार आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे। इस पूरे मामले ने मंडी प्रबंधन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि मंडी कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी धोखाधड़ी संभव नहीं थी। इस घोटाले ने एक बार फिर मंडियों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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