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Delhi दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पुणे की एक मिठाई और डेयरी उत्पादों की दुकान का लाइसेंस निलंबित करने के मामले में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें FDA को दुकान संचालक को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि खाद्य विषाक्तता की शिकायत के बाद FDA की कार्रवाई सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनहित को ध्यान में रखकर की गई थी।
यह मामला पुणे स्थित गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स से जुड़ा है। 11 और 12 जून 2026 को फूड पॉइजनिंग की शिकायत मिलने के बाद FDA अधिकारियों ने प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान स्वच्छता, रिकॉर्ड रखने, लेबलिंग और कर्मचारियों की हाइजीन से संबंधित कई कमियां दर्ज की गई थीं। इसके बाद 12 जून को दुकान का फूड लाइसेंस निलंबित करते हुए कारोबार बंद करने का आदेश दिया गया।
बाद में दुकान संचालक ने FDA के फैसले के खिलाफ अपील की और कमियों को दूर करने का दावा किया। 13 जुलाई को हुए दोबारा निरीक्षण में प्रतिष्ठान को 36 में से 35 अंक मिले और अनुपालन का स्तर 98 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बावजूद लाइसेंस निलंबित रहने पर मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। 17 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने लाइसेंस निलंबन हटाते हुए दुकान को कारोबार शुरू करने की अनुमति दी और महाराष्ट्र FDA को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि 98 प्रतिशत अनुपालन के बाद भी प्रतिष्ठान को बंद रखा गया।
महाराष्ट्र सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 5 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के मुआवजे वाले हिस्से को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि शुरुआती कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी, इसलिए FDA अधिकारियों पर आर्थिक दायित्व डालना उचित नहीं था। इस फैसले से तुकाराम मुंढे के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र FDA को राहत मिली है। मामला खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन और नियामक कार्रवाई की सीमाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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