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Solan. सोलन। जिला सोलन में पेट्रोल पंपों पर बोतलों और कैनों में पेट्रोल नहीं दिए जाने के निर्णय का असर अब किसानों पर साफ दिखाई देने लगा है। कृषि कार्यों के लिए छोटे उपकरणों और पावर टिलरों पर निर्भर किसानों का कहना है कि इस फैसले के कारण उनकी खेती-बाड़ी प्रभावित हो रही है। वर्तमान समय में खेतों में बिजाई और अन्य कृषि गतिविधियां चरम पर हैं, लेकिन ईंधन उपलब्ध न होने से कई किसानों के काम रुक गए हैं। अर्की, कुनिहार, कंडाघाट, चंडी, कसौली, बद्दी, नालागढ़ सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान पावर टिलर, घास काटने की मशीन, स्प्रे पंप, वाटर पंप और अन्य छोटे कृषि उपकरणों का उपयोग करते हैं। इनमें अधिकांश मशीनें पेट्रोल से संचालित होती हैं। किसानों का कहना है कि खेतों तक वाहन ले जाना संभव नहीं होता, इसलिए वे कैनों में पेट्रोल लेकर जाते हैं। लेकिन पेट्रोल पंपों पर कैनों में पेट्रोल न मिलने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय किसान रामलाल, हुक्म सिंह, धनी राम, अशोक, घनश्याम, राकेश, दिनेश, अंकित, प्रवीण और श्यामलाल सहित अन्य किसानों ने बताया कि कई पेट्रोल पंप संचालक निजी कैनों में पेट्रोल भरने से मना कर रहे हैं। किसानों के अनुसार उन्हें बताया जा रहा है कि प्रशासनिक निर्देशों के चलते कैनों में पेट्रोल नहीं दिया जा सकता। इससे खेतों में चल रहे कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं और समय पर बिजाई व अन्य जरूरी काम पूरे नहीं हो पा रहे हैं।किसानों का कहना है कि कुछ स्थानों पर पंप संचालकों द्वारा अपनी कैन उपलब्ध करवाकर सीमित मात्रा में पेट्रोल दिया जा रहा है, जिसके लिए अतिरिक्त राशि भी वसूली जा रही है। किसानों का कहना है कि इससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ रही है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से यदि यह निर्णय लिया गया है तो किसानों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उनका सुझाव है कि कृषि कार्यों के लिए पहचान पत्र या भूमि संबंधी दस्तावेज दिखाने पर निर्धारित मात्रा में पेट्रोल उपलब्ध करवाया जाए, ताकि खेती प्रभावित न हो। किसानों ने जिला प्रशासन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि क्षेत्र की स्थिति का आकलन कर इस समस्या का शीघ्र समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो कृषि कार्यों की गति प्रभावित होगी, जिसका असर फसल उत्पादन पर भी पड़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से कृषि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक व्यवस्था लागू करने की अपील की है।
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