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मनी लॉन्ड्रिंग
Haryana हरियाणा: फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में घिर गया है। ED पीएमएलए (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को अटैच करने की तैयारी कर रही है। यह कार्रवाई लाल किला क्षेत्र में हुए आतंकी धमाके के बाद सामने आए तथ्यों की जांच के दौरान की जा रही है। जांच के अनुसार, धमाका करने वाले आतंकियों में कुछ डॉक्टर इसी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके थे, जिसके बाद ED ने यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट की जांच शुरू की थी। सूत्रों के मुताबिक, ED यह पता लगा रही है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाए गए फंड कथित अवैध गतिविधियों और अपराध से आए तो नहीं। संदेह है कि अवैध तरीके से जुटाई गई रकम को फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित यूनिवर्सिटी की इमारतों के निर्माण में इस्तेमाल किया गया।
इससे पहले, नवंबर 2025 में लाल किला धमाके के बाद जांच के दौरान अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। उनके गिरफ्तारी के बाद ED ने यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े कई हैरान कर देने वाले तथ्य उजागर किए। जांच में यह भी सामने आया कि अल-फलाह ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के पास वैध मान्यता नहीं थी, और छात्रों के साथ धोखाधड़ी की गई थी। ED की टीम फिलहाल यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों की पहचान कर उनका मार्केट वेल्यू पता कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि जांच कुछ और दिनों तक जारी रहेगी। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया जाएगा।
ED ने दावा किया है कि जवाद अहमद सिद्दीकी के निर्देश पर यूनिवर्सिटी और संबंधित ट्रस्ट ने फर्जी मान्यता और गलत दावों के जरिए छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर कम से कम ₹415.10 करोड़ की अवैध कमाई की। इसके अलावा ED कम से कम पांच अन्य मामलों की भी जांच कर रही है, जिनमें दिल्ली में जमीन के टुकड़ों को हासिल करने के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) दस्तावेजों को जाली बनाने का आरोप है। ED अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट की संपत्तियों का उपयोग अवैध कमाई को छुपाने और धोखाधड़ी के लिए किया गया था। यूनिवर्सिटी की इमारतों और अन्य संपत्तियों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और उनका मूल्यांकन किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में ED की कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी पर कड़ा संदेश देती है। यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट पर लगे आरोप शिक्षा क्षेत्र में अवैध गतिविधियों और छात्रों को गुमराह करने के मामलों को उजागर करते हैं। अल-फलाह यूनिवर्सिटी मामले की जांच पूरे देश में शिक्षा संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ED का कहना है कि सभी आरोपियों और ट्रस्ट से जुड़े मामलों की सख्ती से जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर संपत्तियों को अटैच किया जाएगा।
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