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वाशिंग पाउडर SMS करने पर मिल रहा था ड्रग्स, कोडवर्ड वाले नेटवर्क का भंडाफोड़

Nilmani Pal
2 Jan 2026 7:40 AM IST
वाशिंग पाउडर SMS करने पर मिल रहा था ड्रग्स, कोडवर्ड वाले नेटवर्क का भंडाफोड़
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गुजरात। नए साल की खुशियों और पार्टियों के शोर के बीच सूरत पुलिस ने एक ऐसे मामले से पर्दा उठाया है, जिसने सन्न कर दिया. 31 दिसंबर की रात जब शहर में लोग नए साल के स्वागत की तैयारियों में डूबे थे, उसी वक्त सूरत पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने ड्रग्स तस्करी के एक बड़े और चौंकाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़ किया. इस नेटवर्क की खास बात यह थी कि ड्रग्स की खरीद-बिक्री सोशल मीडिया के जरिए की जा रही थी, लेकिन पहचान छुपाने के लिए कोडवर्ड के तौर पर 'वाशिंग पाउडर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था.

एसओजी टीम ने अमरोली थाना क्षेत्र के छापराभाठा इलाके से 21 वर्षीय जील भूपतभाई ठुम्मर को गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से 236.780 ग्राम खतरनाक सिंथेटिक ड्रग ‘म्याऊं-म्याऊं’ यानी मेफेड्रोन (MD) बरामद की गई है. जब्त किए गए इस ड्रग्स की इंटरनेशनल मार्केट में कीमत करीब 7.10 लाख रुपये आंकी गई है, जबकि मोबाइल फोन समेत कुल 7.55 लाख रुपये की चीजें जब्त की गई हैं. जांच में सामने आया है कि आरोपी नए साल की पार्टियों में ड्रग्स की डिलीवरी करने वाला था. इसी दौरान सूचना के आधार पर एसओजी टीम ने उसे धर दबोचा. गिरफ्तारी के बाद जो मोडस ऑपरेंडी सामने आई, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया. आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे WhatsApp, Instagram और Snapchat के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था. फोन कॉल से बचने के लिए वह इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल करता था, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके.

ड्रग्स की पहचान छुपाने के लिए आरोपी ने कोडवर्ड्स की पूरी भाषा ही बना रखी थी. 'निरमा' शब्द का मतलब होता था हाई प्योरिटी म्याऊं-म्याऊं, जबकि 'टाइड' दूसरे दर्जे के ड्रग्स के लिए इस्तेमाल किया जाता था. इसके अलावा 'ओजी' और 'दवा' जैसे शब्द भी कोडवर्ड थे. अगर कोई ग्राहक चैट पर 'निरमा चाहिए' लिखता, तो इसका सीधा मतलब होता था कि उसे हाई क्वालिटी वाला ड्रग चाहिए. इसी तरह वाशिंग पाउडर के नाम पर सोशल मीडिया पर नशे का कारोबार चल रहा था. पूछताछ में पकड़े गए आरोपी जील ठुम्मर ने कबूल किया कि वह इस रैकेट में केवल एक मोहरा है और कमीशन के लालच में यह काम कर रहा था. उसने बताया कि इस पूरे नेटवर्क के सूत्रधार खुशाल वल्लभभाई राणपरिया और भरत उर्फ भाणो दामजीभाई लाठिया हैं. दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए थे, जिन्हें पुलिस ने वांटेड घोषित कर दिया है. पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क सिर्फ सूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य शहरों तक भी फैला हो सकता है.

एसओजी टीम के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि 31 दिसंबर की रात सुरक्षा बंदोबस्त के दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ युवक सोशल मीडिया के जरिए ड्रग्स की सप्लाई कर रहे हैं. इसी सूचना के आधार पर छापेमारी की गई और जील ठुम्मर के पास से 236 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की गई. इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. आगे की जांच एसओजी पुलिस इंस्पेक्टर एपी पंड्या को सौंपी गई है.


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