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Shimla. शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज व अस्पताल में डाक्टरों की सूझबूझ, अनुभव और दो विभागों के बेहतरीन तालमेल ने एक मासूम बच्चे की आंखों की रोशनी जाने से बचा ली। सिरमौर के राजगढ क्षेत्र का रहने वाला पांच वर्षीय मासूम करीब 10 फुट ऊंचाई से गिर गया। हादसे में नुकीला लकड़ी का टुकड़ा बच्चे की दाहिनी आंख के ऑर्बिट में गहराई तक घुस गया था। इससे आंख की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा पैदा हो गया था। बच्चे को गत महीने 24 अप्रैल को आईजीएमसी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। अगले दिन मैक्सिलोफेशियल ओपीडी में जांच के दौरान सीटी स्कैन कराया गया, लेकिन स्कैन में केवल ऑर्बिटल एम्फिसिमा दिखाई दिया। लकड़ी का टुकड़ा स्कैन में पूरी तरह छूट गया। डाक्टरों के अनुसार सूखी लकड़ी का घनत्व हवा जैसा होने के कारण सीटी स्कैन में उसे पहचानना बेहद मुश्किल होता है।
हालांकि, वरिष्ठ मैक्सिलोफेशियल सर्जन डा. रंगीला राम ने तकनीकी रिपोर्ट पर अपनी क्लीनिकल जांच को प्राथमिकता दी। उन्होंने आशंका जताई कि आंख के भीतर कोई बाहरी वस्तु जरूर फंसी हुई है। इसके बाद 28 अप्रैल को बच्चे को नेत्र विज्ञान विभाग में भर्ती किया गया, जहां शुरुआती तौर पर पोस्ट-ट्रॉमेटिक प्रीसेप्टल सेल्युलाइटिस का निदान किया गया। नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष डा. राम लाल शर्मा ने तुरंत संयुक्त सर्जिकल हस्तक्षेप का फैसला लिया। छह मई को जनरल एनेस्थीसिया के तहत डा. रामलाल शर्मा और डा. रंगीला राम के नेतृत्व में संयुक्त आपातकालीन सर्जरी की गई। डाक्टरों ने बेहद सावधानी और कुशलता के साथ आंख की नाजुक आंतरिक संरचनाओं और ऑप्टिक नर्व को सुरक्षित रखते हुए ऑर्बिट में फंसे लकड़ी के बड़े टुकड़े को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।
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