डॉक्टर दंपति से 14 करोड़ की ठगी, डिजिटल अरेस्ट कर रखा था शातिरों ने

2015 से डॉक्टर दंपति चैरिटेबल सर्विस से जुड़ गए लेकिन डॉक्टर दंपति यह नहीं जानते थे कि उनके साथ एक दिन ऐसी ठगी होगी कि साइबर ठग उनकी मेहनत की सारी कमाई लूट लेंगे. दरअसल 24 दिसंबर को डॉक्टर दंपति के पास सायबर ठगों का फोन आया और हमेशा की तरह सायबर ठगों ने डॉक्टर दंपति को फर्जी मुकदमों और अरेस्ट वारंट का डर दिखाया. इससे डॉक्टर दंपति इतना डर गए कि वह साइबर ठगों के जाल में फंसते चले गए साइबर ठगों ने 24 दिसंबर से लेकर 10 जनवरी सुबह तक डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा को वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट करके रखा और इसी दौरान आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए.
डॉक्टर इंदिरा तनेजा ने यह पैसा ट्रांसफर किया. डॉक्टर इंदिरा तनेजा के मुताबिक, साइबर ठगों ने कभी दो करोड रुपए तो कभी 2 करोड़ 10 लाख रुपए इसी तरह से अलग-अलग अमाउंट ट्रांसफर करने को कहा. डॉक्टर इंदिरा तनेजा ने बताया कि साइबर ठगों ने उन्हें अरेस्ट वारंट और फर्जी मुकदमों के नाम पर डराया. इतना ही नहीं साइबर ठगों ने उन्हें पीएमएलए और मनी लॉन्ड्रिंग कानून का भी हवाला देकर डराया और साथ ही उन्हें नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर भी डिजिटल अरेस्ट करके रखा. डॉक्टर इंदिरा तनेजा के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट रहने के दौरान जब भी उन्हें कहीं बाहर जाना होता था या फिर किसी को फोन करना होता था तो साइबर ठग उनके पति डॉक्टर ओम तनेजा के फोन पर वीडियो कॉल करके सब सुनते और देखते थे ताकि उन्हें यह पता चल सके की इस साइबर ठगी के बारे में वह किसी को बता तो नहीं रही है. डॉक्टर इंदिरा तनेजा जब पहली बार पैसा ट्रांसफर करने के लिए अपने बैंक गई तो बैंक के मैनेजर ने भी उनसे पूछा कि इतनी बड़ी रकम वह क्यों ट्रांसफर कर रही हैं तो उन्होंने बैंक मैनेजर को वही बताया जो साइबर ठगों ने उन्हें समझा कर भेजा था. जब भी डॉक्टर इंदिरा तनेजा पैसा ट्रांसफर करने बैंक जाती थी तो बैंक जाने से पहले साइबर ठग उन्हें झूठी कहानी बता देते थे और उन्हें यह कहा जाता था कि अगर कोई भी बैंक का स्टाफ आपसे यह पूछे कि इतना पैसा क्यों ट्रांसफर कर रही हैं तो आपको यही कहानी बतानी है और उन्होंने भी ठीक वैसा ही किया जैसा साइबर ठगों ने उन्हें बोला था.





