सावन के पवित्र महीने का स्वागत करने के लिए शिव मंदिरों में लगा भक्तों का तांता

सावन की सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करते हुए देखे गए। कई प्रमुख मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग पूरे उत्साह और आस्था के साथ धार्मिक समारोहों में शामिल हुए। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। मंथन के दौरान विष निकला, जिससे पूरी सृष्टि के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा।
माना जाता है कि भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को पी लिया और उसे अपने गले में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें 'नीलकंठ' नाम मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी। इसलिए, समृद्धि, वैवाहिक सुख और आध्यात्मिक कल्याण के लिए आशीर्वाद चाहने वाले भक्तों के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे महीने भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए हर सोमवार को व्रत रखते हैं। ये व्रत इस विश्वास के साथ रखे जाते हैं कि सावन के दौरान की गई सच्ची प्रार्थनाओं से शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस महीने में वार्षिक कांवड़ यात्रा भी होती है, जिसके दौरान कांवड़िये गंगा से पवित्र जल लेने के लिए लंबी पैदल यात्रा करते हैं और उसे वापस लाकर भगवान शिव के मंदिरों में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। सावन के दौरान भक्त नियमित रूप से शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग का पारंपरिक 'अभिषेक' करते हैं। इसके लिए दूध, शहद, दही, घी, जल और पवित्र बेलपत्र का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका शिव पूजा में विशेष महत्व है। कई भक्त इस पवित्र महीने के दौरान वे शाकाहारी भोजन करते हैं और मांसाहारी भोजन से दूर रहते हैं।





