
एमपी। विदिशा से मानवता को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है. जहां एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, जिसके चलते महिला की डिलीवरी रात में टॉर्च की रोशनी में सड़क पर कराई गई. इस मामले ने राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. साथ ही कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं.
दरअसल, ये पूरा मामला विदिशा जिले की पठारी तहसील का शनिवार का है. जहां रात करीब 3 बजे प्रसूता महिला को अचानक तेज़ दर्द उठा. जिसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस को बार-बार फोन किया और तीन घंटे तक इंतज़ार हुआ. लेकिन एंबुलेंस नहीं आई. मजबूर होकर परिजन महिला को अस्पताल की ओर ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में दर्द इतना बढ़ गया कि सड़क पर ही त्रिपाल की आड़ में प्रसव कराना पड़ा. तेज़ सर्दी में 2 से 3 घंटे तक जच्चा और बच्चा सड़क पर ही पड़े रहे. टॉर्च की रोशनी में गांव वालों के कांपते हाथ, त्रिपाल के नीचे एक मां की असहनीय चीखें और हर तरफ सिस्टम की खामोशी थी.
प्रसूता महिला संजना आदिवासी ने बताया कि “रात से बहुत दर्द हो रहा था. एंबुलेंस को फोन लगाया लेकिन कोई नहीं आया. ठंड बहुत थी और रास्ते में ही बच्चा हो गया. हम लोग बहुत डर गए थे. वहीं जब इस पूरे मामले में आला अधिकारियों से बात की गई तो अधिकारियों ने पीड़ित द्वारा कॉल किए जाने की बात तो मानी, लेकिन सफाई ये दी कि मोबाइल लगाने के बाद फोन डिस्चार्ज हो गया था.





