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दिल्ली कार ब्लास्ट मामला पुलवामा से जुड़ा, एक और हिरासत में

Nilmani Pal
11 Nov 2025 8:04 AM IST
दिल्ली कार ब्लास्ट मामला पुलवामा से जुड़ा, एक और हिरासत में
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दिल्ली। लाल किले के पास हुए भीषण बम ब्लास्ट की कड़ियां जुड़ना शुरू हो गई हैं. शुरुआती जांच में जो बातें सामने आईं, उससे सुरक्षा एजेंसियों और चौकन्नी हो गई हैं. अब जांच की दिशा दिल्ली से निकलकर कश्मीर, फरीदाबाद और लखनऊ कनेक्शन तक जा पहुंची है. दरअसल, फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर के बीच फैले एक नेटवर्क की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब दो डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद एजेंसियों के हाथ ऐसे सुराग लगे. इन्हीं सुरागों ने जांच टीमों को तीसरे डॉक्टर, डॉ. उमर, की तलाश शुरू हो गई. लेकिन इससे पहले कि एजेंसियां उसे पकड़ पातीं, दिल्ली में धमाका हो गया.

सबसे पहले गिरफ्तारी हुई डॉ. मुजम्मिल शकील की. जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में उसे दबोचा. पुलवामा निवासी मुजम्मिल, फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में सीनियर डॉक्टर था. वह पिछले साढ़े तीन साल से वहीं काम कर रहा था और यूनिवर्सिटी कैंपस में ही रहता था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसने कई अहम राज खोले. उसकी निशानदेही पर फरीदाबाद पुलिस ने धौज इलाके में एक किराए का कमरा छापा. वहां से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, 20 टाइमर और 20 बैटरियां बरामद हुईं. यह सामान पिछले पंद्रह दिनों में ही मुजम्मिल तक पहुंचा था. अमोनियम नाइट्रेट को छिपाने के लिए उसने आठ बड़े और चार छोटे सूटकेस तैयार किए थे. शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह सामग्री किसी बड़े विस्फोट में इस्तेमाल की जानी थी. यानी, डॉक्टर के भेष में बैठा एक शख्स आतंकी हमले की योजना पर काम कर रहा था.

सुरक्षा एजेंसियों ने जब मुजम्मिल के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की, तो उसके जैश-ए-मोहम्मद से संबंधों के प्रमाण मिले. पुलिस को उसके फोन, लैपटॉप और ईमेल से कई एन्क्रिप्टेड मैसेज और विदेशी नंबरों से हुई चैटिंग के डेटा मिले हैं. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मुजम्मिल एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा था, जो पिछले कुछ महीनों से उत्तर भारत में सक्रिय था और असलहा जमा करने के साथ-साथ एक बड़े आतंकी हमले की तैयारी में जुटा था. इसी कारण जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में कई ठिकानों पर छापेमारी की और कुछ और संदिग्धों को हिरासत में लिया है.

जांच के सिलसिले में पुलिस ने डॉ. शाहीन शाहिद नाम की महिला डॉक्टर को गिरफ्तार किया है. शाहीन मूल रूप से लखनऊ के लालबाग की रहने वाली बताई जा रही हैं. यह वही महिला हैं, जिनकी कार से राइफल, पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए. सूत्रों के मुताबिक, यह स्विफ्ट कार उसी अल फलाह यूनिवर्सिटी से जब्त की गई, जहां मुजम्मिल भी काम करता था. तलाशी में कार से Krinkob असॉल्ट राइफल, तीन मैगजीन, 83 राउंड कारतूस, एक पिस्टल और दो खाली खोखे मिले. पुलिस का कहना है कि महिला डॉक्टर शाहीन और मुजम्मिल अक्सर साथ दिखाई देते थे. दोनों के बीच लगातार संपर्क था और कई बार शाहीन की कार का इस्तेमाल मुजम्मिल करता था.

शाहीन से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों को कुछ और नाम और मोबाइल नंबर मिले हैं. कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह साफ हुआ कि मुजम्मिल और शाहीन का संपर्क दिल्ली, लखनऊ और श्रीनगर के कई नंबरों से था. पुलिस को शक है कि शाहीन न सिर्फ मुजम्मिल की करीबी थी, बल्कि उसने लॉजिस्टिक सपोर्ट भी मुहैया कराया. यानी, कार, ठिकाना और जरूरी सामग्री की व्यवस्था में उसकी भूमिका रही. अभी तक शाहीन की ओर से किसी आतंकी संगठन से जुड़ाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एजेंसियां इसे संभावित स्लीपर सेल के रूप में देख रही हैं. इस केस में सबसे पहले गिरफ्तार हुआ था डॉ. आदिल अहमद राथर, जो जम्मू-कश्मीर पुलिस की हिरासत में है. आदिल की निशानदेही पर घाटी में पुलिस को AK-47 राइफल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और आरडीएक्स मिला था. डॉ. आदिल के लॉकर से बरामद हथियार और अब फरीदाबाद से बरामद गोला-बारूद के बीच तकनीकी समानता मिली है. इससे जांच एजेंसियां इस नतीजे पर पहुंची हैं कि आदिल, मुजम्मिल और उमर तीनों एक ही आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा थे.

अब इस केस में जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा एटीएस, फरीदाबाद पुलिस, यूपी पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. अल फलाह यूनिवर्सिटी के परिसर और हॉस्टल में सघन तलाशी अभियान चलाया गया. कई कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव और दस्तावेज जब्त किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह मॉड्यूल विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में था और दिल्ली में ब्लास्ट उसी योजना का हिस्सा था, जिससे राजधानी में भय और अस्थिरता फैलाई जा सके.


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