
Wheather Alart: प्रशांत महासागर में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘नोलो’ एक बार फिर ताकतवर हरिकेन में बदल गया है। पिछले कुछ दिनों से इसकी ताकत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था, लेकिन अब तूफान ने दोबारा तेजी से शक्ति हासिल करनी शुरू कर दी है। मौसम वैज्ञानिक इसकी चाल, हवा की रफ्तार और समुद्र के तापमान पर लगातार नजर रख रहे हैं। आने वाला समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नोलो के और मजबूत होने की संभावना जताई गई है।
अमेरिका के नेशनल हरिकेन सेंटर और सेंट्रल पैसिफिक हरिकेन सेंटर के मुताबिक 2 अक्टूबर की रात नोलो की अधिकतम लगातार हवा की रफ्तार करीब 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। उस समय तूफान फ्रेंच फ्रिगेट शोल्स से लगभग 285 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण पश्चिम में था और करीब 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मौसम एजेंसी ने अगले एक दिन के दौरान इसके तेजी से और मजबूत होने की संभावना भी जताई थी।
नोलो की सबसे खास बात इसकी तेजी से बदलती ताकत है। एक अक्टूबर को यह ट्रॉपिकल स्टॉर्म के रूप में आगे बढ़ रहा था। उस समय इसकी अधिकतम लगातार हवा की गति करीब 95 किलोमीटर प्रति घंटे थी। इसके बाद समुद्र के ऊपर अनुकूल परिस्थितियां मिलने से इसकी संरचना मजबूत होती गई। सैटेलाइट तस्वीरों में तूफान के केंद्र के आसपास गहरे बादलों का घेरा बनने और इसकी ‘आई’ यानी आंख विकसित होने के संकेत दिखाई दिए।
इसके बाद नोलो ने फिर हरिकेन का रूप ले लिया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार तूफान के केंद्र के आसपास बादलों की संरचना लगातार मजबूत हुई और इसकी आंख के आसपास शक्तिशाली संवहनीय गतिविधियां बढ़ीं। यह किसी उष्णकटिबंधीय तूफान के तेजी से ताकत हासिल करने का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
हालांकि नोलो के 241 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा तक पहुंचने के दावे को फिलहाल आधिकारिक पूर्वानुमान के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। 2 अक्टूबर की रात उपलब्ध आधिकारिक बुलेटिन में इसकी लगातार हवाएं करीब 150 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई थीं और अगले एक दिन में तेजी से तीव्र होने की संभावना बताई गई थी। इसलिए तूफान की अधिकतम रफ्तार को लेकर नए आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।
नोलो फिलहाल पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। इसके रास्ते में पापाहानाउमोकुआकेआ मरीन नेशनल मॉन्यूमेंट का क्षेत्र आता है। फ्रेंच फ्रिगेट शोल्स से लिसियान्स्की द्वीप तक के कुछ हिस्सों के लिए ट्रॉपिकल स्टॉर्म चेतावनी जारी की गई है। हालांकि तूफान का केंद्र मुख्य हवाई द्वीप समूह से दूर जा रहा है, लेकिन इसके बाहरी प्रभावों के कारण तेज हवा, ऊंची समुद्री लहरें और खराब मौसम का खतरा बना हुआ है।
नोलो इससे पहले हवाई द्वीपों के दक्षिण से गुजरा था। उस समय भारी बारिश, तेज हवाओं और अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हुआ था। कुछ इलाकों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई थीं। अधिकारियों ने आपात तैयारियां तेज करते हुए नेशनल गार्ड के जवानों को भी तैनात किया था।
वैज्ञानिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नोलो कितनी तेजी से और कितना मजबूत होगा। किसी भी उष्णकटिबंधीय चक्रवात को ताकत देने में गर्म समुद्री सतह की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अलावा वातावरण में नमी, हवा की अलग-अलग ऊंचाइयों पर दिशा और गति में बदलाव यानी विंड शियर तथा ऊपरी वायुमंडल की परिस्थितियां भी तूफान की ताकत तय करती हैं।
अगर शक्तिशाली हरिकेन किसी आबादी वाले तटीय क्षेत्र के करीब पहुंचता है तो तेज हवाएं कमजोर मकानों, पेड़ों, बिजली के खंभों और अस्थायी संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा समुद्र में ऊंची लहरें और तटीय जलस्तर में वृद्धि भी बड़ा खतरा बन सकती है। भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन का जोखिम अलग रहता है।
हालांकि अधिकतम हवा की गति का मतलब यह नहीं होता कि तूफान के प्रभाव वाले पूरे क्षेत्र में उसी रफ्तार से हवा चलेगी। सबसे तेज हवाएं आमतौर पर हरिकेन की आंख के आसपास के हिस्से में होती हैं। किसी स्थान पर वास्तविक असर तूफान की दूरी, आकार, दिशा और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
नोलो के मामले में राहत की बात यह है कि मौजूदा ट्रैक इसे मुख्य हवाई द्वीपों से दूर पश्चिम की ओर ले जा रहा है। इसके बावजूद उत्तर-पश्चिमी हवाई द्वीपों और आसपास के समुद्री क्षेत्रों के लिए खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मौसम एजेंसियां लगातार नए बुलेटिन जारी कर रही हैं।
कुल मिलाकर नोलो ने एक बार फिर अपनी ताकत बढ़ाकर मौसम वैज्ञानिकों का ध्यान खींच लिया है। अगले एक से दो दिन इसकी तीव्रता और आगे की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। समुद्र में मौजूद जहाजों और प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। नोलो की तेजी से बदलती ताकत एक बार फिर दिखा रही है कि समुद्र में सक्रिय शक्तिशाली चक्रवाती सिस्टम बहुत कम समय में अपना रूप बदल सकते हैं।





