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गोबिंदसागर-कोलडैम में मछली के शिकारियों पर शिकंजा

Shantanu Roy
20 May 2026 5:55 PM IST
गोबिंदसागर-कोलडैम में मछली के शिकारियों पर शिकंजा
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Bilaspur. बिलासपुर। मत्स्य संपदा के संरक्षण तथा जलाशयों में अवैध मत्स्य गतिविधियों की रोकथाम के उद्देश्य से मत्स्य विभाग मंडल बिलासपुर द्वारा गोविंद सागर एवं कोलडैम जलाशयों में विशेष निरीक्षण एवं गश्त अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 16 एवं 17 मई को विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर कई अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई। मत्स्य अधिकारी जकातखाना सुरम सिंह एवं उनकी टीम ने गत 17 मई को गोबिंदसागर जलाशय के बडडू, लुरहाड़ तथा दाड़ीभाड़ी क्षेत्रों में गश्त के दौरान लगभग 21 किलोग्राम अंडर साइज जाल जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त 16 मई को गोविंद सागर जलाशय के बागछाल क्षेत्र में अवैध मत्स्य शिकार का एक मामला पकड़ा, जिसमें 500 रुपए जुर्माना एवं मुआवजा राशि के रूप में वसूल किए गए।
इसी तरह कोलडैम जलाशय क्षेत्र में भी विभाग द्वारा रात्रि गश्त के दौरान कड़ी कार्रवाई की गई। मत्स्य क्षेत्रीय सहायक सुन्नी हरीश कुमार ने रात्रि निरीक्षण के दौरान सुन्नी क्षेत्र के समीप अवैध मछली परिवहन के तीन मामले पकड़े हैं, जिनमें 10 हजार रुपए मुआवजा राशि प्राप्त की गई। 20 किलोग्राम अवैध मछली खराब होने के कारण नियमानुसार नष्ट की गई। इसी प्रकार 16 मई को मत्स्य अधिकारी मंदली विवेक कमल एवं उनकी टीम ने गोविंद सागर जलाशय के बीट नंबर-1 में निरीक्षण के दौरान खोली तथा बालू क्षेत्र से लगभग 30 किलोग्राम अंडर साइज गिल नेट जब्त किए गए। मत्स्य क्षेत्रीय सहायक अभिनीत ने सीर खड्ड क्षेत्र में गश्त के दौरान अवैध मत्स्य शिकार के दो मामले पकड़े, जिनमें 1500 रुपए मुआवजा राशि प्राप्त की गई तथा लगभग 7 किलोग्राम मछली की नीलामी कर 600 रुपए राजस्व के रूप में प्राप्त हुई। उधर, ’सहायक निदेशक मत्स्य मंडल बिलासपुर पंकज ठाकुर’ ने बताया कि गोविंद सागर जलाशय में 46 तथा कोलडैम जलाशय में 4 मत्स्य सहकारी सभाओं के माध्यम से 2500 से अधिक मछुआरे मत्स्य आखेट का कार्य कर रहे हैं। विभाग द्वारा प्रतिवर्ष जलाशयों में लाखों की संख्या में मत्स्य बीज संग्रहण किया जाता है । वित्तीय वर्ष 2024-25 में गोविंद सागर जलाशय के मत्स्य उत्पादन में वर्ष वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 की तुलना में 56.45 मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है।
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