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New Delhi. नई दिल्ली। पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का "सेलेक्टिव अप्रोच" अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है। संजय निरुपम ने अपने बयान में कहा कि झारखंड की राजधानी रांची में पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र पिछले दो सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं। उनका दावा है कि इनमें बड़ी संख्या में गरीब और आदिवासी छात्र शामिल हैं, जो अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व वहां जाने के बजाय उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आंदोलन करने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यदि वास्तव में छात्रों की चिंता है, तो उन्हें रांची जाकर आंदोलन कर रहे छात्रों से मिलना चाहिए था। निरुपम ने सवाल उठाया कि जब झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है, तब वहां के छात्रों के आंदोलन को लेकर कांग्रेस चुप क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल उन राज्यों में आक्रामक रुख अपनाती है जहां उसकी सरकार नहीं है, जबकि जिन राज्यों में उसकी सरकार या सहयोगी सरकार है, वहां समान मुद्दों पर चुप्पी साध लेती है। निरुपम ने कहा कि यह रवैया राजनीतिक सुविधा के अनुसार मुद्दों को उठाने का उदाहरण है।
संजय निरुपम ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस का यह व्यवहार उसकी संकीर्ण राजनीतिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "तेरा पेपर लीक और मेरा पेपर लीक" जैसी मानसिकता अपनाकर कांग्रेस जनता को अलग-अलग संदेश देने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, यदि किसी भी राज्य में पेपर लीक जैसी गंभीर घटना होती है, तो सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और राजनीतिक दलों को एक समान संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। निरुपम ने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को निष्पक्ष और समान रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से मांग की कि यदि वह वास्तव में छात्रों के हितों की बात करती है, तो उसे झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों से भी संवाद करना चाहिए। फिलहाल कांग्रेस की ओर से संजय निरुपम के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पेपर लीक और छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच विभिन्न दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
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