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लोकतंत्र की हत्या
Delhi दिल्ली। मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचा और मामले में हस्तक्षेप की मांग की। निर्वाचन आयोग पहुंचे कांग्रेस नेताओं में जयराम रमेश, के.सी. वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, सचिन पायलट समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
इस दौरान मीडिया से बातचीत में सचिन पायलट ने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “हमारे उम्मीदवार का निर्वाचन बिना किसी आधार के रद्द किया गया है। लोकतंत्र में यदि हम यहां नहीं आएंगे तो कहां जाएंगे? चुनाव आयोग को इस मामले में निष्पक्ष मध्यस्थता करनी चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस इस मामले को अदालत में ले जाएगी, तो उन्होंने कहा कि पहले चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जाएगा। उन्होंने कहा, “कल चुनाव आयोग क्या कहता है, उसके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। लेकिन यह लोकतंत्र की सरासर हत्या है और यह सब जानबूझकर किया जा रहा है।”
कांग्रेस का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन राजनीतिक कारणों से खारिज किया गया है, जबकि पार्टी का दावा है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। दूसरी ओर, नामांकन रद्द किए जाने के पीछे हलफनामे में कथित रूप से एक मामले की जानकारी नहीं देने का मुद्दा बताया जा रहा है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद तीसरी सीट पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार की राह आसान हो गई है। अब इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग के रुख और कांग्रेस की अगली रणनीति पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
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