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धर्मशाला। हिमाचल की बड़ी एवं महत्त्वाकांक्षी परियोजना कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तारीकरण के चलते विस्थापन का दर्द झेल रहे परिवारों के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। दशकों से सरकारी भूमि पर अपने आशियाने बनाकर रह रहे लोगों को अब बेघर होने पर खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा। सरकार ने ऐसे परिवारों को राहत देते हुए उनके मकानों और अन्य निर्माण ढांचों का मुआवजा देने को हरी झंडी दे दी है। इस अहम फैसले के तहत लगभग 68 करोड़ रुपए केवल भवन मुआवजे के रूप में बांटे जाएंगे। यह कदम उन सैकड़ों परिवारों के लिए एक बड़ी संजीवनी है, जिनका एयरपोर्ट विस्तार के कारण विस्थापित होना पूरी तरह तय हो चुका है।
प्रदेश सरकार इससे पहले प्रभावित परिवारों को उनकी निजी भूमि के अधिग्रहण का मुआवजा जारी कर चुकी है, लेकिन ताजा फैसला उन लोगों के लिए है, जिनके रिहायशी या अन्य निर्माण ढांचे सरकारी जमीन पर बने हुए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 68 करोड़ रुपए का मुआवजा केवल ईंट-पत्थर और निर्माण ढांचों के लिए होगा, सरकारी भूमि का कोई मूल्य इसमें शामिल नहीं है। गौरतलब है कि इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना की जद में शाहपुर और कांगड़ा विधानसभा क्षेत्रों के कुल 14 राजस्व गांव आ रहे हैं, जिससे कुल 942 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। इनमें से कुछ ऐसे भी थे, जो सरकारी जमीन पर थे और अब उन्हें कुछ भी न मिलने का डर था। फिलहाल प्रदेश सरकार के फैसले के बाद इन परिवारों को राहत मिलेगी। बता दें कि अभी हाल ही में मांझी खड्ड पर बनाने को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने मंथन शुरू कर दिया है।
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