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Bilaspur. बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में नशे के विरुद्ध चल रहे अभियान को अब अत्याधुनिक तकनीक का मजबूत सहारा मिलने जा रहा है। चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए बिलासपुर जिला प्रशासन ने राज्य की पहली सो-टॉक्सा मोबाइल मादक पदार्थ जांच प्रणाली खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगभग 19 लाख रुपए की लागत से जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के माध्यम से खरीदी जा रही इस अत्याधुनिक प्रणाली का शुभारंभ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा शीघ्र किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने यह खुलासा किया।
उपायुक्त के अनुसार यह अत्याधुनिक प्रणाली व्यक्ति के मुख द्रव (लार) के नमूने के आधार पर मात्र पांच मिनट में जांच परिणाम उपलब्ध कराती है। यह चिट्टा (मेथाम्फेटामाइन) सहित एम्फेटामाइन, बेंजोडायजेपाइन, कैनाबिस (टीएचसी) कोकीन तथा ओपिएट्स जैसे छह प्रमुख प्रकार के मादक पदार्थों की मौके पर ही वैज्ञानिक जांच करने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नशे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर पूरी दृढ़ता से कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाना ही नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाते हुए हिमाचल को नशामुक्त प्रदेश बनाना है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में इस प्रणाली की एक मशीन को पायलट परियोजना के रूप में स्थापित किया जाएगा। राहुल कुमार ने बताया कि इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण प्रणाली होगी।
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