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Delhi दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर को जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाई और प्रदेश की आर्थिक स्थिति तथा विकास कार्यों की गति पर भी बातचीत की। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। इसमें राज्य का दर्जा बहाल करने, अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और विकास कार्यों की रफ्तार जैसे विषय शामिल रहे।
सीएमओ के अनुसार, मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर में आर्थिक विकास को गति देने, बेहतर संपर्क व्यवस्था विकसित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और जनकल्याण योजनाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उमर अब्दुल्ला ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार 12 वर्ष तक प्रधानमंत्री पद पर कार्यकाल पूरा करने पर बधाई भी दी। गौरतलब है कि उमर अब्दुल्ला हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित इंडी गठबंधन की बैठक में भी शामिल हुए थे। उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) इंडिया गठबंधन के 35 घटक दलों में शामिल है।
इस बीच, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हाल ही में हुई नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की करीब सात घंटे लंबी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन पार्टी का विधायक दल नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगा। इस प्रदर्शन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने और अन्य संवैधानिक गारंटियों की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाना होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने भी घोषणा की है कि उसके विधायक इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने भी प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मुख्य फोकस जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि रुहुल्लाह मेहदी ने हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व पर 2024 के चुनावी घोषणापत्र के वादों को पूरा करने में पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप लगाया था। इसके बाद से उन्हें पार्टी की बैठकों में नहीं बुलाया जा रहा है। तीन जून को डाचीगाम नेशनल पार्क में हुई सात घंटे लंबी बैठक, जिसमें जंतर-मंतर प्रदर्शन का फैसला लिया गया था, उसमें भी रुहुल्लाह मौजूद नहीं थे।
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