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New Delhi. नई दिल्ली। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक जारी रहा। फिर ये चंद्र ग्रहण खत्म हो गया। देश के कई हिस्सों में लोगों ने इस खगोलीय घटना का दुर्लभ नजारा देखा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग तांबे जैसा लाल दिखाई देने लगा, जिसे आम तौर पर ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। इस बार का चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही शुरू हो गया था, जो ग्रहण समाप्ति के साथ खत्म हुआ। सूतक काल के दौरान कई लोगों ने धार्मिक नियमों का पालन करते हुए पूजा-पाठ और मंदिरों के कपाट बंद रखे।
शाम 6 बजकर 36 मिनट पर झारखंड की राजधानी रांची से भी चंद्र ग्रहण की दुर्लभ तस्वीरें सामने आईं। इस समय तक ग्रहण अपने समापन की ओर बढ़ चुका था और चंद्रमा धीरे-धीरे अपनी सामान्य चमक में लौटता दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने-अपने शहरों से तस्वीरें और वीडियो साझा किए। लाइव खगोलीय वेबसाइट Timeanddate.com की स्ट्रीमिंग के मुताबिक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में ग्रहण का दृश्य विशेष रूप से स्पष्ट दिखाई दिया। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में लोगों ने आसमान में चंद्र ग्रहण का अद्भुत नजारा देखा। साफ मौसम के कारण इन इलाकों में चंद्रमा का रंग परिवर्तन साफ तौर पर नजर आया।
खगोलविदों के अनुसार चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, जिससे उसका रंग लालिमा लिए हुए दिखता है। यही वजह है कि इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। देश के कई शहरों में लोगों ने छतों और खुले मैदानों में इकट्ठा होकर इस खगोलीय घटना का आनंद लिया। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। कुछ स्थानों पर खगोल विज्ञान से जुड़ी संस्थाओं ने दूरबीन की व्यवस्था भी की, ताकि लोग स्पष्ट रूप से ग्रहण का अवलोकन कर सकें।
धार्मिक दृष्टिकोण से भी चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालुओं ने ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान-पुण्य किया। मंदिरों के कपाट ग्रहण खत्म होने के बाद पुनः खोले गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित होता है और इसके लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, बेहतर दृश्य के लिए दूरबीन या टेलीस्कोप का उपयोग किया जा सकता है। साल 2026 का यह पहला चंद्र ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा और देशभर में लोगों ने इसे उत्साह के साथ देखा। अब अगली खगोलीय घटनाओं को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है।
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