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गगरेट में भाजपा की प्रचंड जीत के शिल्पकार बने चैतन्य शर्मा

Shantanu Roy
5 Jun 2026 4:22 PM IST
गगरेट में भाजपा की प्रचंड जीत के शिल्पकार बने चैतन्य शर्मा
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Una. ऊना। ऊना जिला के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के जिला परिषद, बीडीसी, पंचायत प्रधान, उपप्रधान एवं वार्ड पंच के चुनावों में गगरेट विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संगठन, समर्पण और जमीनी मेहनत के बल पर असंभव दिखने वाली राजनीतिक लड़ाइयों को भी निर्णायक विजय में बदला जा सकता है। गगरेट विधानसभा क्षेत्र के तीनों वार्ड 15, 16 और 17 में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की शानदार जीत और कांग्रेस का शून्य पर सिमटना, गगरेट की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इस विजय के केंद्र में पूर्व विधायक एवं भाजपा युवा मोर्चा हिमाचल प्रदेश के उपाध्यक्ष ‘चैतन्य शर्मा’ की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत केवल तीन जिला परिषद सीटों की जीत नहीं, बल्कि गगरेट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के नए आत्मविश्वास, मजबूत संगठन और चैतन्य शर्मा के बढ़ते जनाधार का स्पष्ट प्रमाण है। भाजपा 3, कांग्रेस 0 का परिणाम यह बताता है कि गगरेट की जनता ने एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व, विकासवादी सोच और चैतन्य शर्मा की कार्यशैली पर अपना
भरोसा जताया है।

इस चुनाव में चैतन्य शर्मा की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी पकड़ और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद रहा। उन्होंने केवल मंचों और बैठकों तक सीमित रहने के बजाय अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता तक पहुंचकर उसे इस अभियान का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनाया। छोटे-बड़े हर कार्यकर्ता, पदाधिकारी, वरिष्ठ नेता और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को उन्होंने एक सूत्र में पिरोया। यही संगठनात्मक एकता भाजपा की जीत का सबसे बड़ा आधार बनी। चैतन्य शर्मा ने गगरेट विधानसभा के गांव-गांव, घर-घर जाकर मतदाताओं से सीधा संपर्क साधा। भीषण गर्मी और कड़ी धूप के बावजूद उन्होंने प्रत्याशियों के साथ मिलकर लगातार जनसंपर्क किया। उन्होंने हर वार्ड में न केवल चुनावी माहौल को भाजपा के पक्ष में मजबूत किया, बल्कि प्रत्येक प्रत्याशी का मनोबल भी बनाए रखा। उनके नेतृत्व में कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा, नया उत्साह और जीत का विश्वास दिखाई दिया। यही रही जीत की सबसे बड़ी रणनीति 2024 के राजनीतिक अनुभवों के बाद गगरेट में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना थी। लेकिन चैतन्य शर्मा ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता और अनुभव से इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।
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