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केंद्र की डेडलाइन खत्म, फार्मा उद्योगों पर कार्रवाई की तैयारी

Shantanu Roy
1 Jan 2026 3:33 PM IST
केंद्र की डेडलाइन खत्म, फार्मा उद्योगों पर कार्रवाई की तैयारी
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BBN. बीबीएन। संशोधित शेड्यूल एम के तहत अनुपालन की समयसीमा समाप्त होते ही देशभर के हजारों गैर अनुपालक फार्मा उद्योग सीधे नियामकीय कार्रवाई की जद में आ गए हैं। दरअसल 31 दिसंबर को तय डेडलाइन समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त मोहलत या राहत का आदेश जारी नहीं किया गया है। ऐसे में अब नए साल में दवा निर्माण इकाइयों पर निरीक्षण, लाइसेंस निलंबन और लाइसेंस रद्द जैसी सख्त कार्रवाइयों की प्रक्रिया तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। इस स्थिति का असर एशिया के फार्मा हब माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश समेत पूरे देश में साफ नजर आने लगा है। उद्योग जगत में बैचेनी का माहौल है और आने वाले दिनों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उद्योग से जुड़े आकलनों के अनुसार यह अब तक का सबसे कठोर नियामकीय दबाव माना जा रहा है। संशोधित शेड्यूल एम के मानकों का पालन न होने की स्थिति में देश की करीब 8500 पंजीकृत लघु एवं मध्यम दवा निर्माण इकाइयों में से 60 प्रतिशत से अधिक के संचालन पर संकट खड़ा हो सकता है। सीमित समय और भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता के कारण अधिकांश एमएसएमई इकाइयां तय अवधि में आवश्यक ढांचागत सुधार पूरे नहीं कर सकीं।

गौरतलब है कि संशोधित शेड्यूल.एम मानक वर्ष 2022 में अधिसूचित किए गए थे, जिनके तहत फार्मास्युटिकल क्वालिटी सिस्टमए क्वालिटी रिस्क मैनेजमेंट, प्रोडक्ट क्वालिटी रिव्यू, उपकरणों का वैलिडेशन और प्रभावी प्रोडक्ट रिकॉल मैकेनिज्म जैसे सख्त प्रावधान अनिवार्य किए गए। सरकार की ओर से अपग्रेडेशन के लिए कुछ इकाइयों को छूट, प्रोत्साहन और (हैंडहोल्डिंग) भी दी गई, इसके बावजूद माइक्रो और स्मॉल कंपनियों में अनुपालन की दर बेहद कम रही। देश में करीब 2000 इकाइयों के पास पहले से डब्ल्यूएचओ जीएमपी प्रमाणन है, जबकि लगभग 6500 एमएसएमई इकाइयों में से केवल 1700 यानी करीब 26 प्रतिशत इकाइयों ने ही अपग्रेडेशन की योजना जमा कराई। माइक्रो और स्मॉल कंपनियों को पहले दिसंबर, 2024 तक की समयसीमा दी गई थी, जिसे शर्तों के साथ बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2025 किया गया। कंपनियों के लिए मई 2025 तक गैप एनालिसिस रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य था, लेकिन अब जनवरी 2026 से रिस्क बेस्ड निरीक्षण शुरू होते ही गैर-अनुपालक इकाइयों पर लाइसेंस निलंबन, रद्दीकरण या बंदी जैसी सख्त कार्रवाई की आशंका और गहरी हो गई है।
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