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225 जिलों के लिए केंद्र का बड़ा प्लान, किसानों को मिलेगी तकनीकी मदद
Rajeshwari Nishad
7 Nov 2026 4:29 PM IST

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नई दिल्ली। देश में अनियमित मानसून के कारण कृषि गतिविधियों पर पड़े असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार ने 'अल नीनो' मौसम प्रणाली से प्रभावित देशभर के 225 जिलों में मौजूदा रबी सीजन के दौरान बुवाई को सुगम बनाने के उद्देश्य से आपातकालीन योजना तैयार की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों को फसल की बुवाई करने में आने वाली परेशानियों से राहत दिलाना और कृषि उत्पादन पर संभावित असर को कम करना है।
मानसून की अनियमितता के कारण कई कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में रबी फसलों की बुवाई किसानों के लिए चुनौती बन जाती है। केंद्र सरकार की यह योजना प्रभावित जिलों में कृषि गतिविधियों को जारी रखने और किसानों को बदलती मौसम परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
225 जिलों में रबी बुवाई को लेकर विशेष तैयारी
केंद्र सरकार की योजना देशभर के उन 225 जिलों पर केंद्रित है, जहां अनियमित मानसून का असर देखा गया है। रबी सीजन के दौरान गेहूं, चना, सरसों, मसूर और अन्य फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।इन फसलों की सफल बुवाई के लिए पर्याप्त नमी, अनुकूल तापमान और सिंचाई की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। मानसून के दौरान सामान्य से कम या असमान बारिश होने पर खेतों में नमी की कमी हो सकती है, जिससे बुवाई प्रभावित होने की आशंका रहती है।ऐसे में आपातकालीन योजना के माध्यम से कृषि संबंधी चुनौतियों का सामना करने की तैयारी की जा रही है।
रबी बुवाई में 46 प्रतिशत की गिरावट
आंकड़ों के अनुसार 30 अक्टूबर 2026 तक देश में लगभग 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हुई थी। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 46 प्रतिशत कम है।बीज, उर्वरक और पानी की उपलब्धता पर जोर
सरकार की आपातकालीन योजना में बीज और उर्वरकों की उपलब्धता के साथ जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। प्रभावित जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसलों की योजना तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा।जहां मिट्टी में नमी कम है, वहां किसानों को उपलब्ध पानी और फसल की जरूरत के अनुसार खेती के विकल्प अपनाने की सलाह दी जा सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में उचित फसल चयन और सिंचाई प्रबंधन से संभावित नुकसान कम किया जा सकता है।
ICAR तैयार कर रहा विशेष डिजिटल डैशबोर्ड
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एम.एल. जाट ने बताया कि कृषि संबंधी आपातकालीन योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक डायनेमिक डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है।इस डिजिटल व्यवस्था में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के साप्ताहिक पूर्वानुमान, जलाशयों से संबंधित आंकड़े और जिलास्तरीय कृषि जानकारी शामिल की जाएगी।इससे अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था केवल प्रभावित 225 जिलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश के लिए उपयोगी बनाई जाएगी।
दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने की तैयारी
सरकार धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।ICAR ने इस उद्देश्य से एक विशेष टास्क फोर्स गठित की है। यह दलहन और तिलहन की खेती के विस्तार के अवसरों का अध्ययन करेगी।जहां गेहूं की खेती के लिए पर्याप्त नमी उपलब्ध नहीं है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप दलहन या तिलहन की उपयुक्त फसलें विकल्प बन सकती हैं।इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की संभावना है।
कई राज्यों में मिट्टी की नमी बनी चिंता
मानसून की कमी के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मिट्टी की नमी को लेकर चिंता सामने आई है।रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देशभर में सामान्य से लगभग 12.6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
किसानों को क्या होगा फायदा?
इस योजना का उद्देश्य किसानों को मौसम के कारण उत्पन्न अनिश्चितता के बीच समय पर बुवाई करने में सहायता देना है।जिलास्तरीय जानकारी उपलब्ध होने से किसानों को फसल चयन, सिंचाई और मौसम संबंधी निर्णयों में बेहतर मार्गदर्शन मिल सकता है।इसके अलावा ICAR की ओर से तैयार किए जा रहे डैशबोर्ड को भविष्य में एग्रीस्टैक से जोड़ने की योजना भी है। इससे विभिन्न कृषि स्रोतों की जानकारी एक मंच पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।हालांकि, योजना के अंतर्गत किसानों को किसी नई प्रत्यक्ष नकद सहायता या अतिरिक्त सब्सिडी देने की घोषणा की पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं हुई है।
मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए भी नई नीति की तैयारीएम.एल. जाट ने यह भी जानकारी दी कि अगले दो से चार महीनों में मिट्टी के स्वास्थ्य से संबंधित एक अलग नीति लाए जाने की उम्मीद है।इसका उद्देश्य मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के आधार पर उर्वरकों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।कृषि उत्पादन में मिट्टी की गुणवत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में सही पोषक प्रबंधन किसानों की लागत और फसल उत्पादन, दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
रबी सीजन पर सरकार की विशेष नजर
देश के 225 जिलों के लिए तैयार की गई आपातकालीन योजना ऐसे समय सामने आई है, जब अनियमित मानसून के कारण रबी बुवाई की गति प्रभावित हुई है।सरकार का प्रयास है कि मौसम, पानी और कृषि संसाधनों से संबंधित जानकारी का उपयोग करके किसानों को समय पर उचित मार्गदर्शन दिया जाए।आने वाले सप्ताहों में बारिश, मिट्टी की नमी और सिंचाई की उपलब्धता के साथ बुवाई की प्रगति पर विशेष नजर रहेगी। इस योजना की सफलता काफी हद तक जिलास्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक सही समय पर कृषि सलाह पहुंचने पर निर्भर करेगी।
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