सभी पक्षों के सहयोग से ही एक साल में पूरे होंगे मुकदमे: CJI सूर्यकांत

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लंबित मुकदमों के शीघ्र निपटारे को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जब तक न्यायिक अधिकारी, अदालत, वकील, कोर्ट स्टाफ और मामले से जुड़े सभी पक्ष मिलकर जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक रोजाना सुनवाई और मुकदमों का समयबद्ध निपटारा संभव नहीं होगा।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी मामले के समय पर निपटारे की सबसे पहली शर्त न्यायिक अधिकारी की प्रतिबद्धता है। अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुकदमे की सुनवाई तय समयसीमा के भीतर पूरी हो। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल अदालतों की कोशिश पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी संबंधित पक्षों का सहयोग भी जरूरी है।
उन्होंने जांच एजेंसियों की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेजी प्रमाण, मौखिक गवाही और फॉरेंसिक रिपोर्ट समय पर अदालत में प्रस्तुत किए जाने चाहिए। यदि जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी और सभी साक्ष्य समय पर उपलब्ध होंगे, तो न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और मामलों का शीघ्र निपटारा संभव होगा।
बार एसोसिएशन और वकीलों की भूमिका पर जोर देते हुए CJI ने कहा कि वकील बचाव पक्ष के साथ-साथ कई मामलों में शिकायतकर्ता का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए ट्रायल प्रक्रिया को सुचारु और तेज बनाने में उनका सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कोर्ट स्टाफ की जिम्मेदारी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतों का संचालन, रिकॉर्ड का रखरखाव, रिपोर्ट तैयार करना और प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित ढंग से संभालना कोर्ट स्टाफ की अहम जिम्मेदारी है। यदि इन कार्यों में समय की बचत होगी तो अदालतें सुनवाई पर अधिक ध्यान दे सकेंगी।
CJI सूर्यकांत ने विश्वास जताया कि यदि न्यायिक अधिकारी, वकील, कोर्ट स्टाफ, जांच एजेंसियां और अन्य सभी हितधारक एकजुट होकर यह संकल्प लें कि मुकदमों का ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा किया जाए, तो यह केवल एक सपना नहीं रहेगा बल्कि वास्तविकता बन सकता है। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली में तेजी लाने के लिए सामूहिक प्रयास ही सबसे प्रभावी उपाय है।





