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BREAKING: सरकारी हॉस्टल में 10वीं की 2 छात्रायें मिली प्रेग्नेंट, मचा हड़कंप
Shantanu Roy
26 July 2025 7:47 PM IST

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बड़ी खबर
Kandhamal. कंधमाल। राज्य के कंधमाल जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्राएं, जो अलग-अलग सरकारी छात्रावासों (हॉस्टल) में रह रही थीं, गर्भवती पाई गईं। यह मामला तब उजागर हुआ जब गर्मी की छुट्टियों के बाद हॉस्टल लौटी इन लड़कियों ने सैनिटरी नैपकिन लेने से इनकार किया, जिससे अधिकारियों को उन पर संदेह हुआ।
हॉस्टल स्टाफ को हुआ शक, मेडिकल जांच में खुला मामला
दोनों छात्राएं तुमुदिबांध ब्लॉक के अलग-अलग सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती हैं और हॉस्टल में ही निवास करती थीं। हॉस्टल प्रशासन के अनुसार, जब गर्मी की छुट्टियों के बाद छात्राएं वापस लौटीं तो वे नियमित रूप से मिलने वाले सैनिटरी नैपकिन लेने नहीं पहुंचीं। यह असामान्य व्यवहार देखकर कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों को जानकारी दी और फिर दोनों छात्राओं को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में किए गए रूटीन हेल्थ चेकअप के दौरान जब प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया गया, तो दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। यह खबर मिलते ही हॉस्टल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी।
दो थानों में दर्ज हुई अलग-अलग FIR
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं – एक कोटगढ़ थाना और दूसरी बेलघर थाना में। पुलिस का कहना है कि मामला संवेदनशील है और गंभीरता से जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल पीड़ित छात्राओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उन लोगों की पहचान की कोशिश की जा रही है, जिनके कारण ये स्थितियां बनीं।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर फिर उठे सवाल
ओडिशा में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ अपराध के मामले पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रहे हैं। यह ताज़ा मामला फिर से राज्य की महिला सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। हाल ही में एक और बहुचर्चित मामला राज्य में सुर्खियों में रहा, जिसमें एक बीएड छात्रा ने अपने कॉलेज के विभागाध्यक्ष (HOD) समीर साहू पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। छात्रा द्वारा पुलिस और कॉलेज प्रशासन से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने आरोपी HOD और कॉलेज प्रिंसिपल दिलीप कुमार घोष को सस्पेंड कर दिया। आरोपी को बाद में गिरफ्तार भी किया गया।
सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
इस ताजा घटनाक्रम पर महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सरकारी संस्थानों में पढ़ने और रहने वाली नाबालिग लड़कियों के साथ ऐसी घटनाएं सरकारी लापरवाही और सुरक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाती हैं। वे मांग कर रहे हैं कि न सिर्फ आरोपियों को सजा दी जाए बल्कि पूरे सिस्टम की समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
सरकार और शिक्षा विभाग की चुप्पी
इस पूरे मामले पर अभी तक ओडिशा सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर नाराजगी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है, जहां लोग सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
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