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बिहार की सियासत गरमाई, 10 करोड़ का ऑफर बना चर्चा का विषय

12 Feb 2024 10:06 AM GMT
बिहार की सियासत गरमाई, 10 करोड़ का ऑफर बना चर्चा का विषय
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पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत प्राप्त कर लिया। विपक्ष के वाकआउट के बीच सदन के अंदर विश्वास मत के पक्ष में 130 मत मिले। इसमें विधानसभा उपाध्यक्ष का मत शामिल है। इस बीच जेडीयू सुधांशु शेखर ने राजधानी पटना के कोतवाली पुलिस स्टेशन में आरजेडी नेताओं पर केस दर्ज …

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत प्राप्त कर लिया। विपक्ष के वाकआउट के बीच सदन के अंदर विश्वास मत के पक्ष में 130 मत मिले। इसमें विधानसभा उपाध्यक्ष का मत शामिल है। इस बीच जेडीयू सुधांशु शेखर ने राजधानी पटना के कोतवाली पुलिस स्टेशन में आरजेडी नेताओं पर केस दर्ज कराया है। सुधांशु शेखर की ओर से दर्ज केस में आरजेडी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा है कि जेडीयू विधायकों को तोड़ने की कोशिश की गई और पाला बदलने के लिए उन्हें 10-10 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया था।

सुधांशु शेखर की ओर से थाने में जो शिकायत दर्ज कराई गई है, उसमें आरोप लगाते हुए कहा गया है कि आरजेडी नेताओं की ओर से जेडीयू विधायकों को पांच करोड़ रुपये पहले और बाकी के पांच करोड़ रुपये बाद में देने का ऑफर पेश किया गया था। केस दर्ज करने के बाद आरजेडी के पूर्व विधायक व तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले इंजीनियर सुनील और विधायक संजीव को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इइसके अलावा कोतवाली थाना में जेडीयू विधायक बीमा भारती की गुमशुदगी का भी मामला दर्ज कराया गया है। हरलाखी के विधायक की ओर से यह मामला दर्ज कराया गया है।

बता दें कि सदन में विश्वास मत पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा था कि हमें पता चला कि हमारे विधायकों को तोड़ने के लिए मोटा पैसा दिया जा रहा था। हम सबकी जांच कराएंगे, आखिर इतना पैसा कहां से आया, हम सब पता लगाएंगे। इसके अलावा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी बीजेपी विधायकों के गायब होने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमारे पांच विधायक जो गायब हुए हैं ना, एक-एक का इलाज करूंगा।

बता दें कि बिहार में फ्लोर टेस्ट से पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त की खबरें लगातार सामने आ रही थी। केंद्र और राज्य की खुफिया एजेंसियां भी अपनी नजर बनाई हुई थी। क्राइम ब्रांच या स्पेशल शाखा समेत अन्य खुफिया एजेंसियों के लोग राजनीतिक सरगर्मी के केन्द्र बने सभी मुख्य स्थानों पर सादे लिबास में जमे हुए थे। आयकर विभाग जैसी एजेंसी पैसे के अवैध लेनदेन या अगर कहीं कैश का मूवमेंट होता है, तो उस पर पैनी नजर बनाए हुए थे। कौन-कहां आ रहे या जा रहे हैं, किसकी क्या भूमिका है, इन सभी गतिविधि को ताड़ने में अपने-अपने तरीके से इन एजेंसियों के लोग जुट गए थे।

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