बिहार चुनाव: पहले फेस का मतदान कल, एनडीए को स्पष्ट बढ़त...सर्वे

कल मतदान: बढ़त को लेकर NDA आश्वस्त
कांग्रेस महागठबंधन पहले ही फेस में पिछड़ता दिख रहा, राहुल गांधी को मजाक में ले रहे बिहार की जनता
सोशल मीडिया में वायरल होता तेजस्वी से तीखे और सटीक सवाल
लालू के बड़े बेटे तेजप्रकाश ने महागठबंधन की नैय्या डूबोई, अब तो कह दिया राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेता सब जोकर कहते हैं। मछली पकडऩा, मछली बनाना, मोटर साइकिल चलाना इससे गंभीरता नहीं झलकती, महुआ विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 36 पंचायत की गांव को भोज देंगे और हलवाई होंगे राहुल गांधी, चलेबी भी बनवाएंगे।
रायपुर/पटना (जसेरि)। बिहार चुनाव के पहले चरण के मतदान कल 6 तारीख को होना है, कुल 243 सीटों वाले विधानसभा के लिए गुरुवार को 121 सीटों पर मतदान होना है। उससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री व भाजपा तथा राजग के रणनीतिकार अमित शाह ने 160 से ज्यादा सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाने का दावा किया है। गृहमंत्री अमित शाह पूरे प्रदेश में लगातार सक्रिय रहे तथा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और खूब रैलियां कर जनादेश को एनडीए के पक्ष में करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखे हैं। जिस हिसाब से अमित शाह मेहनत कर रहे हैं किसी भी सूरत में बिहार जीतना उनका मकसद हो गया है। रैलियों में वे सिर्फ बिहार के विकास की बात पर फोकस कर रहे हैं क्योकि जनता विकास चाहती है और उन्हें भरोसा है कि यह काम सिर्फ राजग कर सकता है। यह अक्सर देखा जाता है कि चुनाव के वक्त तो राजनीतिक दल बड़े वादे करते हैं लेकिन उन्हें पूरा कर नहीं पते या भूल जाते है।
पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार थम गया है और 6 को मतदान है। वहीं दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को है। इसके साथ ही कौन जीतेगा कौन हारेगा पर कयास भी लगने लगे हैं। चुनावी सट्टे में फलौदी का सट्टा बाजार का अनुमान काफी सटीक माना जाता है उसके मुताबिक एनडीए को 128 से 134 व महागठबंधन को 100 से कम सीटें मिलने का आसार दिख रहा है। लोगों की निगाहें 14 नवंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी रहेंगी। फलौदी सट्टा बाजार के अनुमान ने सभी को हैरान कर दिया है। फलोदी सट्टा बाजार ने बिहार चुनाव को लेकर जो भाव जारी किया है उसके मुताबिक नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की वापसी के संकेत मिले हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में फस्र्ट फेज की 121 सीटों पर 6 नवंबर को वोटिंग होनी है। इस दौरान मिथिलांचल, कोसी और मगध की 58 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों में अलीनगर से क्चछ्वक्क की स्टार कैंडिडेट मैथिली ठाकुर और मोरवा से जन सुराज के टिकट पर कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर मैदान में हैं। इसके अलावा बाहुबली अनंत सिंह की सीट मोकामा, रीतलाल यादव और रामकृपाल सिंह की कड़ी टक्कर वाली दानापुर सीट भी शामिल हैं। सीएम नीतीश कुमार का गढ़ मानी जाने वाली हरनौत सीट भी दांव पर है। दरभंगा के कुशेश्वर स्थान सीट से गणेश भारती सदा ने VIP के अलावा निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर भी पर्चा भरा था। फॉर्म पर VIP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सिग्नेचर न होने से पार्टी वाला पर्चा कैंसिल हो गया। अब वे निर्दलीय लड़ रहें है, उन्हें महागठबंधन का समर्थन है।
इन 58 सीटों पर महागठबंधन के 61 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे है। दरभंगा जिले की गौरा बौराम सीट से VIP के संतोष सहनी और RJD के अफजल अली खां चुनाव लड़ रहे है। बेगूसराय के बछवाड़ा से कांग्रेस के शिवप्रकाश और CPI के अवधेश कुमार राय मैदान में हैं। बिहार शरीफ में कांग्रेस से उमैर खां और सीपीआई से शिवकुमार चुनाव लड़ रहे हैं।
क्या हैं इस बार के रुझान
फर्स्ट फेज में मिथिलांचल-कोसी और मगध की 58 सीटों में NDA को 38-39 सीटों पर बढ़त दिख रही है। बीजेपी को 5 सीट पर और JDU को 2 सीटों पर फायदा होता दिख रहा है। चिराग की LJP - R सिर्फ एक सीट पर आगे नजर आ रही है। महागठबंधन को 18-19 पर बढ़त दिख रही है। 2020 में महागठबंधन को यहां 21 सीटें मिली थाीं। यहां 5 से 6 सीटों तक नुकसान हो सकता है। इनमें से क्रछ्वष्ठ को 4, कांग्रेस को 1 और CPI - ML को एक सीट का नुकसान नजर आ रहा है।
चिराग और उपेंद्र कुशवाहा ने NDA मजबूत किया
सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडे के मुताबिक, NDA को उपेंद्र कुशवाहा और चिराग के साथ आने का फायदा हो रहा है। इन दोनों ने पिछले चुनाव में 42 सीटों पर नुकसान किया था। ‘चिराग पासवान के आने से NDA को फायदा होगा। पासवान वोट बैंक वे जिधर जाएंगे, ले जाएंगे। मुकेश सहनी का वोट बहुत हद तक पहले से NDA में शि ट हो चुका है। मिथिलांचल में निषाद NDA को वोट कर रहे हैं।’
नीतीश के खिलाफ एंटी इनक बेंसी नहीं
पटना यूनिवर्सिटी के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की डायरेक्टर प्रो. शेफाली रॉय NDA को मजबूत स्थिति में मानती हैं। शेफाली के मुताबिक, इस बार बिहार में बीजेपी की लहर है। नीतीश कुमार का चेहरा और चिराग का साथ आना NDA को आगे रख रहा है।
कांग्रेस और VIP ने महागठबंधन को कमजोर किया
ग्राउंड इनपुट और रुझानों के मुताबिक, कांग्रेस, VIP और CPI - ML का प्रदर्शन इस बार खराब रह सकता है। इन 58 सीटों में से 13 पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, लेकिन सिर्फ एक बेनीपुर सीट पर आगे नजर आ रही है। उधर, VIP 4 सीट पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन किसी पर आगे नहीं है।
इसके अलावा सीपीआई - ML 6 सीटों पर चुनाव मैदान में है और सिर्फ पटना की पालीगंज सीट पर आगे नजर आ रही है। प्रो. शेफाली रॉय महागठबंधन के खराब परफॉर्मेंस का जि मेदार कांग्रेस की जिद को मानती हैं।
मोदी अब भी बिहार में लोकप्रिय, प्रशांत किशोर का असर नहीं
अंग्रेजी अखबार द हिंदू के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं, ‘नरेंद्र मोदी अब भी बिहार में सबसे लोकप्रिय हैं। उनकी मजबूत छवि का नैरेटिव चल रहा है, जो किसी खास जाति से नहीं जुड़ा है।’ ‘प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी खुद को तीसरे विकल्प के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है, लेकिन ग्राउंड पर इसका असर नहीं दिखा। सोशल मीडिया पर जरूर चर्चा है, खासकर पत्रकारों और बाहर रहने वाले बिहारियों में, लेकिन मैदान में कुछ नहीं। उन्होंने 243 में से 3 सीटों पर उ मीदवार वापस ले लिए हैं और 240 सीटों में से किसी एक पर भी जीत की संभावना नहीं लगती।’
किन मुद्दों पर वोट करने का सोच रहे लोग
पसंदीदा पार्टी और वोटर की कास्ट का समीकरण : इन 58 सीटों पर महागठबंधन और NDA लगभग पिछला ही रिजल्ट रिपीट करते नजर आ रहे हैं। लोग पसंदीदा पार्टी और अपनी कास्ट के कैंडिडेट के समीकरण को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कास्ट वोटिंग डिसाइड करने का बड़ा फैक्टर बना हुआ है। नॉन यादव OBC कुर्मी-बनिया NDA को वोट देते हैं। कुशवाहा वोट बंट सकता है, क्योंकि दोनों गठबंधनों ने 23-23 कुशवाहा कैंडिडेट उतारे हैं। मल्लाह समाज वाली सीटों पर वोट NDA से महागठबंधन पर शि ट होता दिख रहा है।
नीतीश की योजनाओं से लोग खुश : नीतीश कुमार की सरकार को 20 साल हो गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ एंटी इनक बेंसी नहीं है। सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडे के मुताबिक, चुनाव से दो महीने पहले की गई घोषणाओं का असर ग्राउंड पर है। खासकर जीविका योजना के तहत महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए भेजे गए हैं। फ्री बिजली के अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत मिलने वाली पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 रुपए की गई है, इसका भी ग्राउंड परअसर है।
RJD की पुरानी इमेज अब भी मुद्दा : पटना यूनिवर्सिटी की प्रो. शेफाली रॉय बताती हैं कि तेजस्वी पिता लालू प्रसाद यादव के समय में बनी जंगलराज वाली इमेज से बाहर नहीं आ पाए हैं। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि उस इमेज को लगातार जिंदा रखा जा रहा है और वोटर्स को याद दिलाया जा रहा है। कारण जो भी हो, लोगों के जेहन में आज भी 2005 से पहले का बिहार ताजा है।





