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बिहार विधानसभा चुनाव: JMM ने महागठबंधन से तोड़ा नाता, छह सीटों पर स्वतंत्र चुनाव की घोषणा

Shantanu Roy
18 Oct 2025 9:37 PM IST
बिहार विधानसभा चुनाव: JMM ने महागठबंधन से तोड़ा नाता, छह सीटों पर स्वतंत्र चुनाव की घोषणा
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Bihar. बिहार। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने महागठबंधन से अपना नाता तोड़ते हुए छह सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि चकाई, धमदाहा, कटोरिया, पिरपैंती, मनीहारी और जमुई सीटों पर झामुमो अपने प्रत्याशी उतारेगी। भट्टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन के भीतर कई सीटों पर विरोधाभास और अंदरूनी कलह हैं, जिनके चलते पार्टी ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा, "हम महागठबंधन के साथ नहीं लड़ेंगे, बल्कि अपनी ताकत पर उतरेंगे। हम विश्वासघात का सामना कर चुके हैं और बिहार में अगली सरकार झामुमो की सहमति के बिना नहीं बनेगी।"

JMM का यह निर्णय महागठबंधन में शामिल राजद, कांग्रेस और वामदलों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। वर्तमान में सात सीटों पर महागठबंधन के घटक दल आमने-सामने हैं। इनमें लालगंज, वैशाली, राजापाकर, बछवाड़ा, रोसरा और बिहारशरीफ प्रमुख हैं। इन सीटों पर प्रत्याशियों के नामांकन ने महागठबंधन की एकजुटता पर प्रश्न खड़ा कर दिया है। सिकंदरा विधानसभा सीट पर भी घमासान मचा है। यह सीट मूल रूप से कांग्रेस के विनोद चौधरी को आवंटित की गई थी। हालांकि, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सिंबल पर पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने इस सीट से नामांकन भरा। इस कदम से सिकंदरा सीट पर भी महागठबंधन के घटक दल आमने-सामने आ गए हैं। अब तक कुल सात सीटों पर ऐसी स्थिति बन चुकी है, जिससे महागठबंधन के अंदर तनाव बढ़ा है।

भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि एनडीए के साथ-साथ महागठबंधन में भी विरोधाभास हैं। पार्टी लगातार विश्वासघात का सामना कर रही है और इस बार JMM चुनाव में स्वतंत्र रूप से उतरकर अपने अधिकार और प्रभाव का प्रदर्शन करेगी। उनका यह कदम झारखंड-बिहार सीमावर्ती क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की दिशा में भी देखा जा रहा है। राजद, कांग्रेस और वामदलों वाले महागठबंधन के नेताओं ने स्थिति को शांत करने के प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। इस बीच, पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच भी असंतोष देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की यह रणनीति महागठबंधन के वोट बैंक पर असर डाल सकती है, खासकर उन जिलों में जहां JMM की मजबूत पैठ है। पार्टी के स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने से महागठबंधन की सीटों पर विभाजन होने की संभावना है, जिससे एनडीए को फायदा मिल सकता है। चुनाव विश्लेषक बताते हैं कि JMM के इस निर्णय से बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। पार्टी की कोशिश है कि सीमावर्ती और आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर सके और आगामी विधानसभा में अपने प्रभाव को बढ़ाए।

महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और उम्मीदवारों के बीच तालमेल बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, प्रत्याशियों के नामांकन और सीटों के आवंटन के कारण गठबंधन में कई जगह विवाद बढ़ गया है। इस प्रकार, बिहार विधानसभा चुनाव में JMM का महागठबंधन से अलग होना राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है। चुनाव में अलग-अलग रणनीति अपनाने से मतदाता व्यवहार और सीटों के नतीजों पर भी असर पड़ेगा। JMM का यह कदम न केवल उनके राजनीतिक अधिकार और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि पार्टी आगामी विधानसभा में अपने मतों और प्रभाव के लिए पूरी तरह तैयार है। चुनाव आयोग द्वारा नामांकन की अंतिम तिथि और मतदान प्रक्रिया से पहले सभी दलों के बीच रणनीतिक बदलाव और गठबंधन समीकरण की समीक्षा जारी रहेगी। JMM के स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के फैसले से महागठबंधन की एकजुटता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि इस बार बिहार की राजनीति में गठबंधन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि JMM की प्राथमिकता बिहार में अपनी राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाना और आदिवासी व सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना है। पार्टी के कार्यकर्ता और स्थानीय नेताओं को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाएं और चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगाए। इस बीच, महागठबंधन के भीतर राजद और कांग्रेस समेत अन्य घटक दल लगातार स्थिति को संतुलित करने के उपाय कर रहे हैं, लेकिन सीटों पर प्रत्याशियों के आमने-सामने होने की स्थिति में तनाव कम होना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आगामी सप्ताह में महागठबंधन और JMM के बीच राजनीतिक गतिरोध और मत विभाजन की स्थिति और स्पष्ट होगी।
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