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महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ चलाया था भ्रामक और फर्जी खबर
Raipur. रायपुर। हाल ही में छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की उप निरीक्षक दिव्या शर्मा के खिलाफ ऑनलाइन इंस्टाग्राम समाचार पोर्टल और सोशल मीडिया पर प्रकाशित हुई भ्रामक और फर्जी खबर ने उनके समाज, परिवार और पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। आपको बता दें कि इंस्टाग्राम की तथाकथित पत्रकार जो अपने आपको छत्तीसगढ़ की मूल निवासी बताते है उनके द्वारा एक भ्रामक और फर्जी समाचार वीडियो प्रकाशित किया गया। पुलिस अधिकारी SI दिव्या शर्मा जो पिछले बारह वर्षों से छत्तीसगढ़ पुलिस में उप निरीक्षक के पद पर तैनात हैं, अपने कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी के लिए पहचानी जाती हैं। उन्होंने हमेशा अपने काम को पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ निभाया है। उनके उत्कृष्ट अनुसंधान और कर्तव्य के प्रति ईमानदारी को देखते हुए वर्ष 2020 में उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में उत्कृष्ट विवेचना के लिए प्रतिष्ठित "प. लखन लाल मिश्र" पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा वर्ष 2022 में केंद्रीय गृह मंत्री पदक भी उनके कर्तव्य और सेवाभाव को मान्यता देने के लिए प्रदान किया गया। दिव्या शर्मा को महिला सशक्तिकरण और समाज सेवा में योगदान के लिए पत्रिका तेजस्वनी सम्मान, पुलिस महानिदेशक द्वारा तीन प्रकरणों में उत्कृष्ट विवेचना के कारण इन्द्रधनुष सम्मान, और विभिन्न मीडिया संस्थानों के माध्यम से "जोश" सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। आपको बता दें कि इससे पहले मध्यप्रदेश के एक बड़े क्षेत्रीय न्यूज़ चैनल के संपादक को एक मंत्री के खिलाफ अनर्गल बयान देने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसी तर्ज छत्तीसगढ़ में भी तथाकथित महिला पत्रकार को ऐसी फर्जी ख़बरें प्रकाशित करने और कई ऐसे ईमानदार अधिकारियों को ब्लैकमेल करने के आरोप में जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है। आपको बता दें कि ये महिला इंस्टाग्राम में फर्जी चैनल खोकर लगातार राज्य सरकार की उपलब्धियों का मज़ाक बनाती नज़र आती है। ये महिला पत्रकार लगातार सरकार के खिलाफ अनर्गल शब्दों का इस्तेमाल करते हुए झूठी ख़बरें प्रकाशित करती है जिसके चलते इस महिला पत्रकार को कई बड़े नेता हवा में उड़ने वाली तथाकथित फर्जी महिला पत्रकार भी कहते है।
वर्तमान में दिव्या शर्मा थाना सिटी कोतवाली रायपुर में पदस्थ हैं, इससे पूर्व उनकी तैनाती सरगुजा और दुर्ग में रही है। इस दौरान भी उन्होंने अनेक उत्कृष्ट कार्य किए हैं। समाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी सराहनीय है, उन्होंने अपने पुत्र और पुत्री का पालन-पोषण पूरी निष्ठा और प्रेम के साथ किया है। उनके इस संतुलित और जिम्मेदार चरित्र के कारण उनकी समाज, परिवार और पुलिस विभाग में अच्छी प्रतिष्ठा है। हाल ही में इंस्टाग्राम न्यूज़ वेबसाइट माध्यम से उनके खिलाफ दिनांक 15 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित खबर में उन्हें "छ.ग. की महिला माफिया पुलिस कर्मी, पुलिस विभाग से भी उपर" जैसे शीर्षक और "माफिया" तथा "सौदेबाज" जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। खबर में यह दावा किया गया कि दिव्या शर्मा रायपुर में पिछले दस वर्षों से जमी हुई हैं और थाने के कर्मचारियों से अभद्र भाषा में बात करती हैं। इस प्रकार की असत्य और भ्रामक रिपोर्ट न केवल उनके पेशेवर मान-सम्मान को धूमिल करती है, बल्कि समाज और परिवार में उनकी प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करती है।
वास्तविकता यह है कि दिव्या शर्मा हमेशा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार विभिन्न स्थानों पर तैनात रही हैं और उनके निर्णय या स्थानांतरण में उन्होंने कभी भी अपने विवेक का उल्लंघन नहीं किया। बावजूद इसके, इंस्टाग्राम न्यूज़ वेबसाइट समाचार वाचिका ने जानबूझकर उनके खिलाफ झूठी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिससे उनके मान-सम्मान और पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति हुई। इसके अलावा, समाचार वाचिका सोमा देवांगन के खिलाफ रायपुर के विभिन्न थानों में पहले से अपराध दर्ज है और उन्होंने झूठी रिपोर्टिंग और नोटिसीजनता को परेशान करने की प्रवृत्ति भी दिखाई है। इस पूरे मामले को देखते हुए दिव्या शर्मा के कानूनी प्रतिनिधि ने इसके संपादक और समाचार वाचिका को पंजीकृत नोटिस भेजकर उन्हें 10 दिनों के भीतर उक्त खबर का खंडन और सार्वजनिक क्षमायाचना प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा न करने की स्थिति में दिव्या शर्मा अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए न्यायालय का सहारा लेंगी और इस मामले से जुड़े सभी खर्च और हर्जाने की जिम्मेदारी नोटिस प्राप्तकर्ताओं की होगी। यह मामला केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं है, बल्कि एक सभ्य, कर्तव्यनिष्ठ और सम्मानित महिला पुलिस अधिकारी के अधिकारों और उनके पेशेवर सम्मान की रक्षा का है।
दिव्या शर्मा का समाज, परिवार और पुलिस विभाग में स्थापित सम्मान इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है। उनके खिलाफ जानबूझकर फैलायी गई भ्रामक खबर ने समाज और पुलिस विभाग में उनके पेशेवर संबंधों को प्रभावित किया है, और उनके सार्वजनिक छवि को धूमिल किया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पत्रकारिता की किसी भी गतिविधि में सच्चाई और निष्पक्षता अनिवार्य है, और इसके उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण में यह सिद्ध होता है कि डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से फैलायी जाने वाली झूठी और भ्रामक खबरें न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश और भय का वातावरण भी उत्पन्न कर सकती हैं। इस मामले में दिव्या शर्मा ने अपनी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई की शुरुआत की है, जो आने वाले समय में अन्य व्यक्तियों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित करेगी कि झूठ और भ्रामक खबरों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रकार, दिव्या शर्मा का यह मामला डिजिटल मीडिया पर जवाबदेही, सच्चाई और पेशेवर सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में सामने आया है, जिसमें उनके कानूनी प्रतिनिधि ने स्पष्ट रूप से नोटिस जारी कर प्रेस और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी और कानूनी दायित्वों की याद दिलाई है।
ट्रांसफर को लेकर कोतवाली में साज़िश की आशंका, अधिकारी कर्मचारी और मीडियाकर्मी जुड़े?
हाल ही में छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की उप निरीक्षक दिव्या शर्मा के ट्रांसफर के मामले ने नया मोड़ लिया है। जानकारी मिली है कि थाना कोतवाली में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर पहले ही हो चुके हैं, लेकिन वे अभी भी थाने में मिठाई और मलाई खाते देखे जा रहे हैं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनके इस व्यवहार की जानकारी थी फिर दिव्या शर्मा को हटाने के पीछे किसी साज़िश का हिस्सा यह अधिकारी कर्मचारी बने। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ पुलिस कर्मी और बाहरी लोग मिलकर पत्रकारों के माध्यम से दिव्या शर्मा के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाने का प्रयास कर चुके थे। हालांकि यह प्रयास असफल रहा। बताया गया है कि पत्रकारों तक पहुंचकर कुछ लोग इसके ऑफिस जाकर भी इस मामले में षड्यंत्र रचने का प्रयास कर चुके थे।
एक थाना कोतवाली निवासी ने बताया कि कुछ महिला और पुरुष अधिकारी पैसे का लालच देकर दिव्या शर्मा के खिलाफ झूठी शिकायत करने की कोशिश कर चुके थे। लेकिन दिव्या शर्मा की ईमानदारी, अनुशासन और उत्कृष्ट कार्यों के कारण स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने झूठे आरोप लगाने से मना कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम से एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि बाकी ट्रांसफर लिस्ट में शामिल लोगों के मामले में कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या उनके लिए अलग नियम हैं या जानबूझकर दिव्या शर्मा को हटाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस विभाग के इस तरह के मामलों की जांच आवश्यक है ताकि किसी भी तरह की साजिश या अनुचित दबाव का पता लगाया जा सके।
पुलिस विभाग में ऐसे मामलों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि अधिकारी-कर्मचारी अपने स्वार्थ के लिए विभागीय अनुशासन और निष्ठा का उल्लंघन कर रहे हैं या नहीं। वहीं, दिव्या शर्मा के समर्थक और कई स्थानीय नागरिक मानते हैं कि उनका ट्रांसफर पूरी तरह अनुचित और राजनीतिक या व्यक्तिगत दबाव के तहत किया गया है। हालांकि, दिव्या शर्मा अपने कार्यों और ईमानदारी के लिए पहचानी जाती हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों और कर्तव्य के प्रति निष्ठा के कारण जनता और पुलिस विभाग में उनकी अच्छी प्रतिष्ठा है। ऐसे में उनके खिलाफ झूठी शिकायत और ट्रांसफर की प्रक्रिया पर पूरी जांच करना बेहद जरूरी हो गया है। इस मामले की पड़ताल पुलिस विभाग और संबंधित अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र रूप से की जानी चाहिए ताकि किसी भी साजिश या अनुचित कार्रवाई का खुलासा हो और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
सालों से एक ही थानों में जमे है कई पुलिस अधिकारी
लंबे समय से रायपुर जिले में तैनात कई उपनिरीक्षक (SI) और कांस्टेबल अब तक स्थानीय थानों में स्थायी रूप से बने हुए हैं और जिला छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कई पुलिसकर्मी जुगाड़ में लगे हैं ताकि किसी भी हाल में उन्हें रायपुर से बाहर ट्रांसफर न किया जाए। इस कारण रायपुर के सिटी कोतवाली, गंज, उरला, गुढ़ियारी, टिकरापारा और खमतराई जैसे थानों में लंबे समय से एक ही स्टाफ तैनात है। सूत्रों ने बताया कि हाल ही में रायपुर एसपी ने कई थानों से कर्मचारियों का ट्रांसफर आदेश जारी किया है, लेकिन कुछ थाना प्रभारी अभी तक इन आदेशों के अनुसार कर्मचारियों को रवानगी नहीं दे रहे हैं।
इस स्थिति से प्रशासनिक व्यवस्थाओं में असंतुलन पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों की वजह से थानों में ताजगी और नए दृष्टिकोण की कमी महसूस हो रही है। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ट्रांसफर प्रक्रिया नियमित और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि सभी थानों में समान रूप से मानव संसाधन उपलब्ध रहें और अपराध नियंत्रण में सुधार हो सके। पुलिसकर्मियों के लंबे समय तक स्थायी बने रहने की यह प्रवृत्ति प्रशासनिक चुनौती के रूप में उभर रही है और इसे सुधारने के लिए विभाग स्तर पर सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है।
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