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लाल किला धमाका: देश को झकझोर देने वाला हादसा
New Delhi. नई दिल्ली। दिल्ली में हुए लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट ने देश की राजधानी को झकझोर दिया है। लेकिन इस धमाके से भी ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब जांच एजेंसियों ने पाया कि इस वारदात की जड़ें किसी सीमापार आतंकी कैंप में नहीं, बल्कि एक मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं में थीं। डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की आड़ में चल रहा यह नेटवर्क अब ‘टेरर फैक्ट्री’ के नाम से चर्चाओं में है।
मौत का मेडिकल नेटवर्क
सफेद कोट में लिपटे जो लोग जीवन बचाने की शपथ लेते हैं, वही अब मौत का कारोबार करते पकड़े जा रहे हैं। दिल्ली धमाके के बाद जांच में खुलासा हुआ कि फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसका मेडिकल कॉलेज आतंकवाद का नया अड्डा बना हुआ था। यहां डॉक्टरों की टीम न सिर्फ़ कट्टरपंथी विचारधारा फैला रही थी, बल्कि लैब में विस्फोटक तैयार करने तक की साजिश रच रही थी।
फरीदाबाद की यूनिवर्सिटी बनी जांच का केंद्र
सोमवार शाम लाल किले के पास हुए धमाके के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को जांच के दायरे में लिया। मंगलवार को NIA, दिल्ली पुलिस और हरियाणा ATS ने संयुक्त रूप से यूनिवर्सिटी परिसर और मेडिकल कॉलेज पर छापेमारी की। यूनिवर्सिटी फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित है, जहां से कई छात्रों और कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। जांच में सामने आया कि जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़े कुछ लोग यहां भर्ती और फंड ट्रांसफर के जरिए सक्रिय थे।
लाल किले के पास हुई थी दहला देने वाली वारदात
सोमवार शाम करीब 6:52 बजे जब दिल्ली के दिल—लाल किले—के पास मेट्रो स्टेशन के समीप खड़ी एक i20 कार में धमाका हुआ, तो आसपास का इलाका दहल गया। दर्जनों वाहन जलकर खाक हो गए, कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत की पुष्टि हुई। दिल्ली पुलिस ने तुरंत आसपास का इलाका सील कर NDRF और फॉरेंसिक टीमों को मौके पर भेजा।
i20 कार बनी जांच की सबसे अहम कड़ी
धमाके में जिस i20 कार का इस्तेमाल हुआ, उसी कार से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में पता चला कि वह कार अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर उमर मोहम्मद के नाम से जुड़ी थी। वह पुलवामा निवासी बताया जा रहा है और धमाके से ठीक पहले उसी कार में यूनिवर्सिटी से निकला था। CCTV फुटेज में उसकी मौजूदगी ने एजेंसियों को चौंका दिया।
यूनिवर्सिटी लैब से मिला विस्फोटक पदार्थ
छापेमारी के दौरान पुलिस को यूनिवर्सिटी की एक प्रयोगशाला में अमोनियम नाइट्रेट और अन्य रासायनिक पदार्थ मिले, जो विस्फोटक बनाने में उपयोग किए जाते हैं। तीन कर्मचारियों को मौके से हिरासत में लिया गया। टीम को शक है कि लैब में शिक्षण की आड़ में RDX और डेटोनेटर जैसे पदार्थ तैयार किए जा रहे थे।
शुरू हुआ जम्मू-कश्मीर से फरीदाबाद तक फैला सिलसिला
दरअसल, 19 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर के बनपोरा नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टर मिलने के बाद एजेंसियों ने एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया था। इसी क्रम में डॉक्टर मुजम्मिल शकील को हिरासत में लिया गया, जिसके पास से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ। पूछताछ में उसने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अन्य डॉक्टरों—अकील अहमद, शाहीन शाहिद और उमर मोहम्मद—के नाम बताए, जिससे यह पूरा नेटवर्क खुल गया।
2,900 किलो विस्फोटक ने हिलाई जांच एजेंसियां
हरियाणा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक करीब 2,900 किलो बम बनाने का सामान, असॉल्ट राइफलें, डेटोनेटर, और कैस्टर ऑयल जैसी संदिग्ध चीजें बरामद की गई हैं। यह सामग्री बड़े आतंकी हमले की योजना की ओर इशारा करती है। फॉरेंसिक जांच से पता चला कि यह विस्फोटक उच्च ग्रेड के थे और कई हिस्सों में ट्रांसपोर्ट किए जा रहे थे।
डॉक्टरों की भूमिका से दंग एजेंसियां
पकड़े गए ज्यादातर आरोपी मेडिकल प्रोफेशन से हैं। इनमें डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मचारी और लैब असिस्टेंट शामिल हैं। एजेंसियों को यह जानकारी हैरान करने वाली लगी कि डॉक्टरों को इसलिए चुना गया क्योंकि उन पर आमतौर पर शक नहीं होता। कई आरोपी मेडिकल रिसर्च की आड़ में विस्फोटक पदार्थों के साथ प्रयोग कर रहे थे।
अनंतनाग के डॉक्टर आदिल के पास से मिली AK-47
अनंतनाग मेडिकल कॉलेज में कार्यरत डॉ. आदिल अहमद राथर को गिरफ्तार कर उसके लॉकर से AK-47 राइफल और गोला-बारूद बरामद किया गया। इसी बरामदगी के बाद फरीदाबाद में छापेमारी शुरू हुई। माना जा रहा है कि आदिल ने हथियारों की सप्लाई चेन संभाल रखी थी और उसके संपर्क जम्मू-कश्मीर से लेकर हरियाणा तक फैले थे।
महिला डॉक्टर की गाड़ी में राइफल
लखनऊ की डॉक्टर शाहीन शाहिद की कार से असॉल्ट राइफल और कारतूस बरामद होने से जांच को नया मोड़ मिला। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या वह हथियारों की ट्रांसपोर्टर थी या किसी अन्य के इशारे पर कार दी गई थी। शुरुआती जांच में शाहीन और कुछ अन्य आरोपियों के बीच पुराने संबंधों की पुष्टि हुई है।
गुजरात में राइसिन बनाने की साजिश
गुजरात एटीएस ने डॉक्टर मोइनुद्दीन सैयद को गिरफ्तार किया, जो कथित रूप से राइसिन नामक अत्यंत घातक प्रोटीन तैयार कर रहा था। उसके पास से अरंडी का तेल, हथियार और लैब इक्विपमेंट बरामद हुए। सूत्रों के अनुसार, वह पाउडर के रूप में इस जैविक विष को तैयार कर भीड़भाड़ वाले इलाकों में फैलाने की योजना बना रहा था।
फतेहपुर तगा गांव और मस्जिदों में पूछताछ
फरीदाबाद के फतेहपुर तगा गांव में NIA ने कई मस्जिदों में छापेमारी की और जमात से जुड़े कुछ लोगों से पूछताछ की। जांच में यह भी पता चला कि आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल और इमाम इरफान अक्सर इन्हीं मस्जिदों में आते थे। चार जमातियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि नेटवर्क की गहराई का पता लगाया जा सके।
मेडिकल संस्थानों की आड़ में फैलता कट्टरपंथ
टीआईओ रिपोर्ट में बताया गया है कि यह नेटवर्क देशभर के मेडिकल कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में धीरे-धीरे अपनी जड़ें फैला रहा था। छात्रों को रिसर्च और सोशल वर्क के नाम पर जोड़ा जा रहा था। कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से किया जा रहा था।
कानूनी कार्रवाई और UAPA के तहत केस
अब तक पकड़े गए सभी संदिग्धों पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act), आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं। NIA और दिल्ली पुलिस की जॉइंट टीम ने डिजिटल डिवाइस, फोन, लैपटॉप, बैंक रिकॉर्ड और विदेशी फंडिंग से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच एजेंसियां अब कोर्ट में ठोस सबूत पेश करने की तैयारी कर रही हैं।
परिजनों का दावा- हमारे बच्चे निर्दोष
आरोपियों के परिवारों ने मीडिया से कहा है कि उनके बच्चे निर्दोष हैं और उन्हें फंसाया गया है। कई परिवार इस बात से हैरान हैं कि उनके बेटे मेडिकल पढ़ाई के लिए गए थे और अचानक आतंक के आरोपों में घिर गए। एजेंसियों का कहना है कि कुछ आरोपी दोस्तों और ऑनलाइन माध्यम से धीरे-धीरे इस नेटवर्क में शामिल हुए।
देशभर में हाई अलर्ट
दिल्ली धमाके के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट जारी है। सभी राज्यों को रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, धार्मिक स्थलों और बाजारों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह अब तक का सबसे संगठित आतंकी मॉड्यूल है, जो शिक्षित वर्ग की आड़ में काम कर रहा था। यह मॉड्यूल सिर्फ हिंसा तक सीमित नहीं, बल्कि साइबर और फंडिंग नेटवर्क के जरिए देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकता है।
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