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New Delhi. नई दिल्ली। उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगे 2020 की कथित ‘बड़ी साजिश’ मामले में गिरफ्तार छात्र नेता व सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने 14 दिन की अंतरिम जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने यह राहत उनकी बहन की शादी में शामिल होने के लिए दी है। आदेश के अनुसार, खालिद को 16 दिसंबर से 29 दिसंबर 2025 तक जमानत पर रिहा किया जाएगा। अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं।
इनमें सबसे प्रमुख यह है कि खालिद इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और न ही मीडिया से बातचीत करेंगे। उन्हें दिल्ली छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और अदालत द्वारा तय किए गए स्थान पर ही रहने तथा समय-समय पर स्थानीय पुलिस थाने में उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शादी से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से जमानत का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं। उन्हें फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों की कथित 'लार्जर कांस्पिरेसी' यानी बड़ी साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने उन पर यूएपीए (UAPA) की गंभीर धाराओं के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की कई कठोर धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) व एनआरसी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान खालिद सहित कुछ अन्य लोगों ने हिंसा भड़काने की साजिश रची थी।
उधर, खालिद का पक्ष लगातार यह कहता रहा है कि उन्हें राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया है और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं। खालिद की नियमित जमानत याचिका कई बार अदालतों में लंबित रही है, लेकिन अभी तक उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल पाई है। अंतरिम जमानत को लेकर खालिद के परिवार ने राहत की सांस ली है। उनकी बहन की शादी लंबे समय से निर्धारित थी, जिसके चलते परिवार ने अदालत से गुहार लगाई थी। कोर्ट ने व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए यह राहत दी है, हालांकि उनकी निगरानी और गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के आदेश भी शामिल किए हैं। फिलहाल, इस फैसले ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है और अब सभी की निगाहें आगे होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
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