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BIG BREAKING: यूक्रेन संकट पर मोदी-जेलेंस्की की लंबी बातचीत

Shantanu Roy
11 Aug 2025 7:09 PM IST
BIG BREAKING: यूक्रेन संकट पर मोदी-जेलेंस्की की लंबी बातचीत
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New Delhi. नई दिल्ली। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण और लंबी टेलीफोनिक बातचीत हुई, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति, शांति प्रयास, रूस पर संभावित प्रतिबंध और द्विपक्षीय सहयोग के कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब रूस ने हाल के दिनों में यूक्रेन पर हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है और वैश्विक मंच पर युद्ध को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत "लंबी और महत्वपूर्ण" रही, जिसमें वैश्विक कूटनीतिक हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा यूक्रेन के लोगों के लिए दिए गए समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया।

रूस के हालिया हमले और यूक्रेनी चिंता
जेलेंस्की ने पीएम मोदी को रूस के हालिया हमलों के बारे में अवगत कराया। विशेष रूप से उन्होंने जापोरिजिया में एक बस स्टेशन पर हुए हमले का उल्लेख किया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि यह हमला इस बात का प्रमाण है कि "ऐसे समय में जब युद्ध समाप्त करने की कूटनीतिक संभावना दिखाई दे रही है, रूस केवल अपनी आक्रामकता और हत्याओं को जारी रखने की इच्छा दिखा रहा है।" यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि जापोरिजिया पहले से ही युद्ध का एक संवेदनशील मोर्चा है। यहां स्थित परमाणु संयंत्र पर नियंत्रण को लेकर भी रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से तनाव है।

शांति प्रयासों में भारत की भूमिका
जेलेंस्की के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के शांति प्रयासों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत इस बात से सहमत है कि यूक्रेन से संबंधित सभी निर्णयों में यूक्रेन की भागीदारी अनिवार्य है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि "बिना यूक्रेन की सहमति के कोई भी समझौता न तो सार्थक होगा और न ही उसका कोई स्थायी परिणाम निकलेगा।" भारत ने अब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष में एक संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है। एक ओर उसने रूस के साथ ऐतिहासिक और सामरिक संबंध बनाए रखे हैं, वहीं दूसरी ओर वह यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देता रहा है। पीएम मोदी का यह बयान इसी नीति की निरंतरता को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह यूक्रेन की संप्रभुता और हितों के प्रति समर्थन का भी संकेत देता है।

रूस पर प्रतिबंध और ऊर्जा निर्यात का मुद्दा
बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि रूसी ऊर्जा, विशेष रूप से तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है, ताकि रूस की युद्ध को फंड करने की क्षमता कम हो सके। जेलेंस्की ने जोर देकर कहा, "हर उस नेता को मॉस्को को स्पष्ट संदेश देना चाहिए, जो रूस पर प्रभाव डाल सकता है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात कर रहा है और उसे रियायती दरों पर खरीदकर अपने घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर करने में लगा है। हालांकि भारत ने पश्चिमी देशों के रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का औपचारिक रूप से समर्थन नहीं किया है, लेकिन वह लगातार यह कहता आया है कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। इस संदर्भ में जेलेंस्की की अपील भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखी जा सकती है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में मुलाकात तय
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि वे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे। यह मुलाकात न केवल भारत-यूक्रेन संबंधों को नई दिशा दे सकती है, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की स्थिति को भी वैश्विक मंच पर और स्पष्ट कर सकती है। इसके अलावा जेलेंस्की ने पीएम मोदी को यूक्रेन आने का न्योता दिया, जबकि मोदी ने भी उन्हें भारत आने का आमंत्रण दिया। इस तरह के पारस्परिक निमंत्रण दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का संकेत देते हैं।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इस दौरान लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, हजारों की मौत हुई है और यूक्रेन के कई शहर तबाह हो चुके हैं। पश्चिमी देश रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा चुके हैं, लेकिन भारत, चीन और कुछ अन्य देशों ने रूस के साथ अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंध जारी रखे हैं। भारत की स्थिति विशेष महत्व रखती है क्योंकि वह वैश्विक दक्षिण का एक प्रमुख नेता है और रूस तथा पश्चिमी देशों दोनों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। यही कारण है कि यूक्रेन भारत को एक संभावित मध्यस्थ और कूटनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।

भारत की कूटनीतिक रणनीति
भारत का रुख अब तक यह रहा है कि वह किसी भी पक्ष के साथ खुलेआम नहीं खड़ा होगा, बल्कि युद्ध समाप्त करने के लिए संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करेगा। पीएम मोदी ने पिछले साल भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के दौरान कहा था कि "यह युद्ध का युग नहीं है"। इसके बावजूद भारत रूस से सस्ते तेल और गैस खरीदना जारी रखे हुए है, जिससे पश्चिमी देशों में सवाल उठते रहे हैं। यूक्रेन द्वारा तेल प्रतिबंध की अपील इस नीति को चुनौती दे सकती है, लेकिन भारत के लिए यह फैसला लेना आसान नहीं होगा, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई नियंत्रण उसके लिए अहम मुद्दे हैं।

संभावित असर और आगे की राह
मोदी-जेलेंस्की की यह बातचीत एक ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय रूस-यूक्रेन युद्ध के किसी ठोस समाधान की तलाश में है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली दोनों नेताओं की मुलाकात इस दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है। हालांकि, रूस पर प्रतिबंध और तेल आयात जैसे मुद्दों पर भारत का रुख कठोरता से बदलने की संभावना फिलहाल कम है। लेकिन यह भी सच है कि यूक्रेन के साथ बढ़ती बातचीत और समर्थन के संकेत भारत की कूटनीतिक स्थिति को वैश्विक स्तर पर संतुलित और सक्रिय बनाए रखेंगे।
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