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BIG BREAKING: FBI ने पूर्व सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के घर मारा छापा

Shantanu Roy
22 Aug 2025 7:43 PM IST
BIG BREAKING: FBI ने पूर्व सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के घर मारा छापा
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New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर बड़ा धमाका हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और अब उनके कट्टर आलोचक जॉन बोल्टन के घर पर FBI ने छापा मारा है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब बोल्टन ने खुले तौर पर ट्रंप की भारत संबंधी नीति और विशेषकर दंडात्मक टैरिफ को लेकर तीखी आलोचना की थी। समाचार एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, छापेमारी की यह कार्रवाई गोपनीय दस्तावेजों के प्रबंधन से जुड़ी जांच का हिस्सा है। हालांकि अब तक बोल्टन को न तो हिरासत में लिया गया है और न ही उन पर किसी तरह का आरोप तय किया गया है। इस छापे ने अमेरिकी राजनीति और कूटनीति दोनों ही स्तर पर खलबली मचा दी है।

FBI का संकेतभरा संदेश
इस छापेमारी के बाद FBI निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया पर एक क्रिप्टिक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा— “कानून से ऊपर कोई नहीं, FBI एजेंट मिशन पर हैं।” यह संदेश छापे की शुरुआत के तुरंत बाद पोस्ट किया गया, जिसे ट्रंप विरोधियों ने बोल्टन मामले से जोड़कर देखा। हालांकि, ट्रंप कैंप की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। लेकिन बोल्टन पर यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की कड़ी के तौर पर भी देखी जा रही है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में ट्रंप को ‘सनकी राष्ट्रपति’ बताते हुए जमकर निशाना साधा था।

भारत-चीन-रूस पर बोल्टन के तीखे बयान
जॉन बोल्टन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में ट्रंप की नीतियों को भारत के लिए हानिकारक बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत संबंध इस समय बेहद खराब स्थिति में हैं। बोल्टन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन रूस पर कोई नए प्रतिबंध लगाने में असफल रहा है। चीन के खिलाफ भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट, भारत को ही बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका द्वारा केवल भारत पर टैरिफ की मार डालना, उसे रूस और चीन के और करीब धकेल सकता है।

ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी: भारत पर डबल वार
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर पहले 25% टैरिफ लगाया था। लेकिन रूस से तेल खरीद जारी रखने के चलते उन्होंने अतिरिक्त 25% दंडात्मक टैरिफ भी लगा दिया। इस तरह भारत पर कुल 50% टैरिफ लागू कर दिया गया है। अमेरिका का तर्क है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को सहारा दे रहा है। लेकिन भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा की जरूरतों को देखते हुए भारत को सस्ती दरों पर तेल आयात करना पड़ रहा है।

बोल्टन की चिंता: भारत को चीन-रूस की ओर धकेल रहे ट्रंप
बोल्टन ने कहा कि पिछली अमेरिकी सरकारें हमेशा भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर देती रही हैं, ताकि एशिया में चीन के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। लेकिन ट्रंप की दंडात्मक नीतियां और टैरिफ धमकियां उल्टा असर डाल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत को अकेला छोड़ा गया या उस पर ज्यादा दबाव बनाया गया, तो यह अमेरिका के लिए घातक साबित हो सकता है। बोल्टन का मानना है कि इस स्थिति में भारत रूस और चीन की ओर और ज्यादा झुकाव दिखा सकता है, जिससे एशिया में अमेरिका की पकड़ कमजोर होगी।

क्या राजनीतिक प्रतिशोध है यह छापा?
अमेरिकी मीडिया और विपक्षी खेमे का मानना है कि बोल्टन पर हुई कार्रवाई महज कानूनी जांच नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की एक झलक है। बोल्टन ट्रंप के सबसे प्रखर आलोचकों में से एक रहे हैं और उन्होंने अपनी किताब तथा इंटरव्यू में ट्रंप की विदेश नीति, खासकर भारत और चीन पर रुख को असफल बताया था। इस पृष्ठभूमि में FBI की कार्रवाई को कई लोग “ट्रंप विरोधियों को डराने” की कोशिश मान रहे हैं। हालांकि, कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मामला केवल गोपनीय दस्तावेज प्रबंधन तक सीमित है, तो यह नियमित जांच प्रक्रिया भी हो सकती है।

भारत के लिए संदेश क्या?
विश्लेषकों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए भी एक संदेश है। अमेरिका की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति में भारत अब केवल एक रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि बड़ा दबाव बिंदु बन चुका है। बोल्टन का यह बयान कि “अमेरिका ने भारत का साथ छोड़ दिया है” इस बात की ओर इशारा करता है कि वॉशिंगटन की नीतियों से नई दिल्ली को असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
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