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BIG BREAKING: मनी लॉन्ड्रिंग केस में सत्येंद्र जैन की 7.44 करोड़ की संपत्ति ED ने अटैच की
Shantanu Roy
23 Sept 2025 7:19 PM IST

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बड़ी खबर
New Delhi. नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर गहरा गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को उनकी कंपनियों से जुड़ी 7.44 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर दी। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत की गई है। ED की यह कार्रवाई उस CBI एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फरवरी 2015 से मई 2017 के बीच मंत्री रहते हुए जैन ने अपनी घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।
जांच की पृष्ठभूमि
सीबीआई ने साल 2018 में ही सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और उनके सहयोगियों के खिलाफ disproportionate assets (आय से अधिक संपत्ति) मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। आरोप था कि जैन ने मंत्री पद का दुरुपयोग कर शेल कंपनियों और करीबी सहयोगियों के जरिए अपनी काली कमाई को वैध बनाया। सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद ही प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
ED की जांच में क्या मिला?
ED की जांच में सामने आया कि नोटबंदी (नवंबर 2016) के तुरंत बाद जैन के करीबी अंकुश जैन और वैभव जैन ने करीब 7.44 करोड़ रुपये बैंक में जमा कराए। ये रकम अलग-अलग कंपनियों के खातों में दिखाई गई, लेकिन जांच से पता चला कि ये कंपनियां असल में सत्येंद्र जैन के ही नियंत्रण में थीं। आयकर विभाग और अदालतों ने भी माना कि अंकुश और वैभव जैन, जैन परिवार के बेनामीदार के रूप में काम कर रहे थे।
पहले भी हो चुकी है संपत्ति जब्ती
ED इससे पहले भी जैन और उनकी कंपनियों से जुड़ी 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी थी। अब 7.44 करोड़ रुपये की नई अटैचमेंट के बाद कुल जब्त संपत्ति का आंकड़ा 12.25 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। एजेंसी का दावा है कि यह पूरी संपत्ति सत्येंद्र जैन की आय से अधिक है और इसे शेल कंपनियों व हवाला ऑपरेटरों के जरिए खपाया गया।
राउज एवेन्यू कोर्ट में केस की सुनवाई
फिलहाल यह मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में विचाराधीन है। ED जल्द ही इसमें पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। कोर्ट ने इससे पहले जैन की न्यायिक हिरासत को कई बार बढ़ाया था और अब इस ताजा जब्ती से उनके खिलाफ मामला और मजबूत होता दिख रहा है।
CBI केस में मिली थी राहत
हालाँकि, सत्येंद्र जैन को एक अन्य मामले में राहत मिल चुकी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) में भर्ती प्रक्रिया को लेकर दर्ज हुए केस में CBI ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि कई वर्षों की जांच के बावजूद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 या किसी अन्य कानून के तहत आरोपों को साबित करने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि आपराधिक षडयंत्र के संकेत तक मौजूद नहीं हैं।
AAP की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इस ताजा कार्रवाई पर औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी पहले भी इन आरोपों को राजनीतिक षडयंत्र बता चुकी है। AAP का कहना है कि बीजेपी सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। सत्येंद्र जैन लंबे समय तक दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे और कोविड काल में उनकी भूमिका अहम रही थी। उन पर कानूनी शिकंजा कसने से न केवल उनकी व्यक्तिगत साख पर असर पड़ा है, बल्कि AAP की राजनीतिक छवि भी प्रभावित हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ED की यह ताजा कार्रवाई दिल्ली की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है, खासकर तब जब राजधानी में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
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