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BIG BREAKING: किश्तवाड़ में बादल फटने से मचा कहर, 12 लोगों के मौत की आशंका

Shantanu Roy
14 Aug 2025 2:52 PM IST
BIG BREAKING: किश्तवाड़ में बादल फटने से मचा कहर, 12 लोगों के मौत की आशंका
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Kishtwar. किश्तवाड़। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पड्डर सब-डिवीज़न में गुरुवार को भीषण प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपा दिया। पड्डर के चिशोती गांव में मचैल माता मंदिर के पास धार्मिक यात्रा के दौरान अचानक बादल फटने की घटना हुई, जिससे पूरे इलाके में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। घटना के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मचैल माता यात्रा के लिए इकट्ठा थे। स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों के मुताबिक, इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की आशंका है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। टेंटों में ठहरे श्रद्धालु पानी और मलबे की चपेट में आ गए।
आधे से ज्यादा गांव तबाह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बादल फटने के तुरंत बाद पानी और मलबे का तेज़ बहाव गांव में घुस आया। देखते ही देखते कई मकान, अस्थायी टेंट और श्रद्धालुओं के ठहरने की जगह बह गई। प्रारंभिक आकलन में बताया गया है कि आधे से ज्यादा गांव तबाह हो चुका है। गांव के रास्ते और पुल बह जाने के कारण रेस्क्यू टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है। कई जगहों पर भारी मलबा जमा हो गया है, जिसे हटाने में समय लग रहा है।


बचाव कार्य में भारी चुनौतियां
प्रशासन ने एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल), एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल), सेना और स्थानीय पुलिस को राहत व बचाव कार्य में लगा दिया है। डेल्टा फोर्स की टुकड़ियों को भी ऑपरेशन में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, खराब मौसम, लगातार बारिश और पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन के कारण हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग में मुश्किलें आ रही हैं। कई बचाव दलों को पैदल ही आगे बढ़ना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मचैल माता मंदिर यात्रा मार्ग गांव के बीच से गुजरता है। घटना के वक्त बड़ी संख्या में यात्री यहां मौजूद थे। प्राथमिक आशंका है कि हजारों की संख्या में लोग यात्रा मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर फंसे हो सकते हैं। पिछले 15 दिनों से पुंछ, राजौरी और डोडा सहित जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है, जिससे नदी-नालों का जलस्तर पहले से ही ऊंचा था। इस कारण बचाव कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सड़क और संचार व्यवस्था ठप
बादल फटने के कारण चिशोती गांव तक जाने वाली मुख्य सड़क बह गई है। कई मोबाइल टावर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रशासन ने अस्थायी वायरलेस और सैटेलाइट फोन की व्यवस्था कर बचाव टीमों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश की है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल के नजदीक पहुंच चुकी हैं और लापता लोगों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। घायलों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। गंभीर रूप से घायल लोगों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी है, लेकिन मौसम अभी भी बड़ी बाधा बना हुआ है।
प्रशासन और सरकार की निगरानी
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हादसे को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की है। उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि बचाव और राहत कार्यों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी शिविर, भोजन और चिकित्सा की त्वरित व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही, नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए राजस्व विभाग की विशेष टीम मौके पर भेजी गई है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों को नि:शुल्क उपचार का आश्वासन दिया है। मौसम विभाग ने आने वाले 24-48 घंटों में जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों, खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है।
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