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आजम खां और बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल भेजा गया, देखें VIDEO...
Shantanu Roy
17 Nov 2025 7:22 PM IST

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बड़ी खबर
Rampur. रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को रामपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने दो पैन-कार्ड मामले में दोषी करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाने के बाद पुलिस ने अदालत में ही उन्हें न्यायिक हिरासत में ले लिया और जिला जेल भेज दिया।
मामले का इतिहास
यह विवाद 2019 का है, जब भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला ने दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर दो पैन-कार्ड बनाया था, ताकि वह चुनाव लड़ने की योग्य आयु (25 साल) दिखा सके। असली जन्मतिथि अब्दुला की 1 जनवरी 1993 बताई जाती है, जिसे देखकर वे 2017 विधानसभा चुनाव के समय न्यूनतम आयु की पूर्ति नहीं करते थे। आरोप है कि दूसरी पैन-कार्ड में उनकी जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 दर्ज की गई थी।
फैसला और सजा
विशेष न्यायाधीश शोभित बंसल की अदालत ने सोमवार को दोनों को दोषी ठहराया और सात-सात साल की कैद की सजा सुनाई। अदालत ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों में यह फैसला दिया, और जुर्माना भी तय किया। फैसले के बाद, पुलिस ने दोनों को कोर्ट के भीतर ही कस्टडी में ले लिया, और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
पिता-पुत्र की भावुक क्षण
सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद कोर्टरूम में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। दोनों पिता आजम खां और बेटा अब्दुल्ला कुछ पल एक-दूसरे का सामना करते रहे, उनके चेहरे पर तनाव और भविष्य को लेकर चिंता साफ झलक रही थी। इसके बाद, बड़े बेटे अदीब कोर्ट के बाहर आए और गले लगाकर आजम खां को गाल चूमा और अब्दुला को गले लगाया। यह नज़ारा उनकी पारिवारिक पीड़ा को दर्शाता है।
वादियों और विरोधी की प्रतिक्रिया
फैसला सुनने पर बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना, जिन्होंने यह मामला दर्ज कराया था, कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने इस फैसले को सत्य और न्याय की जीत करार दिया है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में साक्ष्यों की कमी नहीं थी और न्यायपालिका ने सही फैसला सुनाया।
आजम खां की प्रतिक्रिया
जेल जाने से पहले जब पत्रकारों ने आजम खां से उनकी प्रतिक्रिया पूछी, तो वे बेहद शांत दिखे। उन्होंने कहा, “कोर्ट ने मुझे गुनहगार समझा और सजा सुनाई है। अदालत का फैसला है, मैं कुछ नहीं कहूंगा।” उनका यह बयान इस बात का भी संकेत देता है कि वे पेशेवर समीक्षा या अपील की सम्भावना पर भी विचार कर सकते हैं, लेकिन अभी उन्होंने अदालत के निर्णय को स्वीकार किया है।
राजनीतिक और कानूनी महत्व
यह फैसला आजम खां के लिए एक और बड़ा झटका है। वे न केवल लंबे समय से सपा के वरिष्ठ नेता हैं, बल्कि उन्होंने रामपुर विधानसभा सीट पर कई बार जीत दर्ज की है और चार बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं — 2017 में उन्हें विधानसभा का टिकट मिला था, लेकिन उनकी विश्वसनीयता जन्म तिथि विवाद के कारण हाईकोर्ट द्वारा चुनौती दी गई थी। यह फैसला उनकी राजनीतिक छवि और भविष्य दोनों पर इसके गहरे असर डाल सकता है। विशेष रूप से उन मतदाताओं और समर्थकों के बीच, जो उन्हें भ्रष्टाचार और दस्तावेज़ों की जालसाजी के आरोपों के लिए पहले से ही सवालों के घेरे में देखते आए हैं।
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