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Hospice. धर्मशाला। धर्मशाला नगर निगम में महापौर और उपमहापौर के चुनाव में एक बार फिर दिलचस्प सियासी घटनाक्रम देखने को मिला है। चुनाव के दौरान भाजपा पार्षद हर्ष ओबरॉय के अचानक बैठक से निकलकर चले जाने और एक आजाद प्रत्याशी द्वारा उपमहापौर पद के लिए प्रस्तावक बनने से शहर का सियासी पारा चढ़ गया है। पिछली बार बैठक का बहिष्कार करने वाले आजाद पार्षद का यह नया दांव राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। विधायक सुधीर शर्मा ने महापौर पद के लिए शमशेर नैहरिया का नाम आगे किया गया, जिनके प्रस्तावक के रूप में पार्षद प्रवीण प्रकाश सामने आए। वहीं, उपमहापौर (डिप्टी मेयर) पद के लिए प्रेरणा गुलेरिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया।
इस प्रस्ताव ने तब एक बड़ा राजनीतिक कौतूहल पैदा कर दिया, जब उनके प्रस्तावक के रूप में एक आजाद प्रत्याशी ने कमान संभाली। इस चुनाव में आजाद प्रत्याशी का रुख सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि महापौर और उपमहापौर के चुनाव के लिए बुलाई गई पिछली बैठक में इसी आजाद प्रत्याशी ने कांग्रेस पार्षदों के साथ वॉकआउट किया था और चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा तक नहीं लिया था। लेकिन इस बार न केवल उन्होंने बैठक में भाग लिया, बल्कि उपमहापौर के लिए प्रस्तावक बनकर पूरी सियासी समीकरण को ही बदल कर रख दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान उस वक्त अचानक हलचल मच गई जब भाजपा के एक पार्षद बैठक से ही अचानक बाहर चले गए। नगर निगम के इस बेहद अहम चुनाव के दौरान उनका इस तरह से बाहर जाना कई राजनीतिक सवालों को जन्म दे गया है।
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