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कचहरी में दरोगा पर हमला: वर्दी फाड़ी, सिर-चेहरे पर गहरे घाव, प्रशासन अलर्ट
Shantanu Roy
16 Sept 2025 6:51 PM IST

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Varanasi. वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई है। कचहरी परिसर में वकीलों ने दरोगा मिथलेश प्रजापति पर जमकर हमला कर दिया। उन्हें बुरी तरह पीटा गया, जिससे उनकी वर्दी फट गई और सिर व चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। बताया गया कि दरोगा के सिर और चेहरे पर तीन गहरे घाव हैं, जबकि पूरे शरीर पर 13 चोट के निशान हैं। उनके साथ मौजूद सिपाही से भी मारपीट की गई। घायल दरोगा को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। घटना के बाद प्रशासन ने कचहरी परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी है और पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, डीआईजी शिवहरि मीणा, डीसीपी काशी जोन प्रमोद कुमार, एडीसीपी क्राइम सरवणन टी, एडीएम सिटी आलोक वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिला जज के साथ बैठक कर वकीलों से कोर्ट परिसर खाली करने की अपील की गई ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन ने इसे कानून व्यवस्था की चुनौती बताते हुए सख्ती की चेतावनी दी है।
यूपी– वाराणसी कचहरी परिसर में वकीलों ने सब इंस्पेक्टर मिथिलेश प्रजापति को दौड़ा–दौड़ाकर पीटा, अधमरा कर दिया, हालत गंभीर है। 3 दिन पहले इन्हीं दरोगा का एक वकील से विवाद हो गया था। उसी की खुन्नस में आज ये सब हुआ। pic.twitter.com/E7sehqpJgZ
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) September 16, 2025
विवाद की पृष्ठभूमि: बड़ागांव का जमीन विवाद
दरअसल, यह मामला बड़ागांव थाना क्षेत्र के पुआरी खुर्द गांव से जुड़ा है, जहां दो पट्टीदारों – मोहित कुमार सिंह पुत्र मुन्ना लाल और प्रेमचंद्र मौर्या पुत्र स्व. दयाराम मौर्या – के बीच लंबे समय से चल रहा जमीन विवाद हाल ही में हिंसक रूप ले बैठा। बताया जा रहा है कि मोहित पक्ष का आरोप है कि आराजी संख्या 125 पर अस्थायी स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कराया जा रहा है। वहीं, प्रेमचंद्र पक्ष का दावा है कि वे आराजी संख्या 126 पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वैध निर्माण कर रहे हैं और मेड से चार फीट दूरी छोड़कर काम कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच कई बार कहासुनी और झड़पें हो चुकी हैं। पूर्व में भी 28 जून 2025 को इसी विवाद को लेकर बड़ागांव थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। विवाद बढ़ता गया और अब यह कचहरी परिसर तक पहुंच गया। 13 सितंबर 2025 को समाधान दिवस जनसुनवाई के दौरान पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई।
दरोगा पर हमला: कैसे हुआ पूरा मामला?
पुलिस ने बताया कि विवाद बढ़ने पर शांति भंग में दोनों पक्षों का चालान कर दिया गया। इसी दौरान आरोप है कि दरोगा मिथलेश प्रजापति ने एक पक्ष के वकील से मारपीट कर दी, जिससे मामला और भड़क गया। वकीलों ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए दरोगा पर हमला कर दिया। उन्होंने दरोगा को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। घटना इतनी गंभीर थी कि दरोगा की वर्दी फट गई और वे घायल होकर गिर पड़े। उनके साथ मौजूद सिपाही भी चोटिल हुआ। घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घायल दरोगा को तुरंत ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि दरोगा की हालत गंभीर है और चिकित्सकों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स भेजा। कचहरी चौकी पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया ताकि किसी और अप्रिय घटना से बचा जा सके। डीएम, डीआईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और वकीलों से कोर्ट परिसर खाली करने की अपील की। साथ ही, मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, घायल दरोगा के इलाज के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने वकीलों से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि न्यायिक प्रक्रिया बाधित न हो।
कानून व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत परिसर जैसे संवेदनशील स्थान पर पुलिसकर्मी पर हमला होना चिंताजनक है। यह घटना दर्शाती है कि स्थानीय विवाद किस तरह हिंसक रूप ले सकते हैं और कानून व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे विवादों का समाधान कानूनी प्रक्रिया से करें और हिंसा से बचें। साथ ही, पुलिस द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन करें ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक स्थिति से बचा जा सके। इस पूरी घटना ने न केवल प्रशासन बल्कि न्याय व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएँ बढ़ा दी हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और कानून के पालन में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
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