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हथियारों की डील नाकाम: स्कूल दोस्तों ने बनाई अवैध गन सप्लाई की साजिश
Shantanu Roy
28 July 2025 8:37 PM IST

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Lucknow. लखनऊ। राजधानी लखनऊ के कृष्णा नगर थाना क्षेत्र में सोमवार को पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के एक मामले का सनसनीखेज खुलासा करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस ने 32 बोर की तीन पिस्टल, तीन मैगजीन, पांच कारतूस और एक अपाची बाइक बरामद की है। दोनों आरोपी आपस में पुराने स्कूल मित्र हैं और पुलिस के अनुसार, ये हथियार किसी बड़ी डील के लिए खरीदे गए थे जिन्हें आगे बेचा जाना था। पुलिस ने सौदे से ठीक पहले इनकी योजना को विफल कर दिया।
आरोपियों की पहचान और बरामदगी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पहला नाम आयुष सिंह उर्फ वैभव (20 वर्ष) और दूसरा नाम निशांत पांडेय उर्फ नीशू (19 वर्ष) का है। पुलिस ने इन दोनों को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद चेकिंग के दौरान पकड़ा। तलाशी लेने पर उनके पास से 32 बोर की तीन पिस्टल, तीन मैगजीन, पांच जिंदा कारतूस तथा एक अपाची मोटरसाइकिल बरामद की गई। बरामद बाइक आरोपी आयुष की भाभी के नाम पर पंजीकृत है, लेकिन मौके पर कोई वैध कागजात प्रस्तुत न कर पाने के चलते वाहन को एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत सीज कर दिया गया।
स्कूल की दोस्ती से अपराध की राह तक
पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दोनों आरोपी वर्ष 2015 में लखनऊ के ग्रीनवे पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे, और वहीं से इनकी दोस्ती शुरू हुई थी। एक दशक बाद अब दोनों मिलकर अवैध हथियारों की डीलिंग में शामिल हो गए। पूछताछ में उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पूर्व उन्होंने हुसड़िया चौराहे से 'राज' नामक एक व्यक्ति से ये हथियार खरीदे थे। इसके बाद ये इन्हें आगे बेचने की योजना बना रहे थे, लेकिन सौदा पूरा हो पाता इससे पहले ही पुलिस ने दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पहले से आपराधिक पृष्ठभूमि में एक आरोपी
आरोपी निशांत पांडेय के खिलाफ पहले से ठाकुरगंज थाने में एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिससे पुलिस का संदेह और गहरा हो गया है। इससे प्रतीत होता है कि वह आदतन अपराधी हो सकता है और पहले भी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है। हालांकि आयुष के खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है, लेकिन दोनों की संलिप्तता इस नए नेटवर्क में गंभीर सवाल खड़े करती है।
पुलिस को हथियार सप्लाई नेटवर्क की तलाश
लखनऊ पुलिस अब इस मामले को एक बड़े अवैध हथियार नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। विशेष रूप से 'राज' नामक हथियार विक्रेता की पहचान और गिरफ्तारी पुलिस के लिए प्राथमिकता बन गई है। पुलिस को आशंका है कि ये युवक अपराधियों को सस्ते दामों पर हथियार बेचने के काले धंधे से जुड़े हो सकते हैं। साथ ही पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आखिर इन युवकों तक ये हथियार कैसे पहुंचे, और इसके पीछे किस गिरोह का हाथ है।
एसआई घीसूराम सरोज कर रहे विवेचना
मामले की विवेचना की जिम्मेदारी उप-निरीक्षक घीसूराम सरोज को सौंपी गई है। वे आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगे हैं। अब तक की जानकारी से लगता है कि ये दोनों युवक केवल मोहरे थे और इनके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है। पुलिस अन्य जिलों और एजेंसियों से समन्वय कर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
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