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Shimla. शिमला। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य एमआईएस के तहत होने वाली सी-ग्रेड सेब खरीद को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। एमआईएस की नई नीति को मंजूरी के लिए 20 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक के समक्ष रखा जाएगा। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इस सीजन से सेब खरीद की पूरी व्यवस्था बदल जाएगी। पहली बार राज्य में सी ग्रेड के सेब बेचने पर बागबानों को फार्मर आईडी दिखानी होगी। सेब खरीद को लेकर डिजिटल पोर्टल भी खोला गया है, जहां पर किस बागबान से कितने बोरी सेब खरीदे गए हैं उसकी पूरी जानकारी अपलोड़ होगी। विभाग के सचिव सी पालरासू के अनुसार अब एमआईएस के तहत सेब बेचने वाले प्रत्येक बागबान को अपनी फार्मर आईडी प्रस्तुत करनी होगी।
इसके बिना खरीद नहीं होगी। साथ ही एक बागबान अधिकतम 30 बोरी सी-ग्रेड सेब ही एमआईएस के तहत बेच सकेगा। नई नीति के तहत सेब बहुल क्षेत्रों में 20 किलोमीटर के दायरे में खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि बागबानों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। जिन क्षेत्रों में सडक़ सुविधा सीमित है, पिछले वर्ष जहां लगभग 300 अस्थायी कलेक्शन सेंटर बनाए गए थे, इस बार सुव्यवस्थित व्यवस्था के तहत 40 के करीब नए केंद्र विकसित किए जाएंगे। परिवहन में लगी गाडिय़ों की भी मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे किसी भी स्तर पर गड़बड की संभावना कम होगी। सरकार पहली बार एमआईएस खरीद में कृषि और बागबानी विभाग के अधिकारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। हर वर्ष प्रदेश के बागबानों को औसतन करीब 60 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाता है।
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