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New Delhi/Bastar. नई दिल्ली/बस्तर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर क्षेत्र में विकास की कमी और नक्सलवाद को लेकर संसद में महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई के कारण ही विकास कार्य प्रभावित रहे। शाह ने स्पष्ट किया कि हथियार उठाने वाले किसी भी समूह को संविधान की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, “ये जो हथियारी मूवमेंट के लोग हैं, कहते हैं हमारे साथ अन्याय हो रहा है। अन्या हो रहा है तो उसके लिए व्यवस्थाएं और अदालतें बनी हैं। लेकिन हथियार उठाओगे और संविधान को नहीं मानोगे, ऐसा नहीं चलेगा। नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो भी ऐसा करेगा, उसका यही अंजाम होगा।” अमित शाह ने बस्तर क्षेत्र के विकास की समीक्षा करते हुए कहा कि 70 वर्षों में 60 साल कांग्रेस की सरकार रही, फिर भी वहां विकास नहीं पहुंचा।
उन्होंने इस पर सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस शासन में विकास नहीं हुआ तो आज दूसरों से हिसाब मांगना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक करोड़ों लोग गरीबी में रहे, कई युवा मारे गए, कई दिव्यांग बने, लेकिन विकास वहां नहीं पहुंचा। इस पूरे संघर्ष का जिम्मेदार कौन है, यह विचार करने की आवश्यकता है। शाह ने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि एक राजनीतिक और वैचारिक आइडियोलॉजी है, जिसे इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान स्वीकार कर लिया। अमित शाह ने यह भी कहा कि नक्सल प्रभावित रेड कॉरिडोर में शामिल 12 राज्यों और आदिवासियों की समस्याओं को संसद में उजागर करने का मौका अब उन्हें मिला है। वे वर्षों से चाहते थे कि यह मुद्दा संसद में और दुनिया के सामने आए। उन्होंने बताया कि बस्तर में विकास न पहुँच पाने के कारण वहां के युवाओं को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासी क्षेत्र की जमीन और संसाधनों तक विकास के लाभ नहीं पहुंच पाए।
Hon'ble HM & Minister of Cooperation Shri Amit Shah addresses Lok Sabha on India’s Decisive Fight Against Naxalism - 30 March 2026 https://t.co/6aHQVWyUs2
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) March 30, 2026
गृहमंत्री ने कहा कि आज भी बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य चल रहे हैं और सरकार इसका पूरा ध्यान रख रही है। उन्होंने संसद में यह संदेश भी दिया कि हथियार उठाकर शासन के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आदिवासियों और स्थानीय लोगों से अपील की कि वे संविधान और लोकतंत्र की प्रक्रिया के माध्यम से ही अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ें। अमित शाह ने कहा कि विकास और सुरक्षा दोनों को संतुलित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बस्तर में विशेष योजनाओं के माध्यम से गरीब और पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। यह भी कहा गया कि नक्सलवाद की जड़ में सामाजिक और आर्थिक असमानताएं नहीं बल्कि वैचारिक आंदोलन है, जो हिंसा के माध्यम से अपनी मांगें मनवाने का प्रयास करता है।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य न केवल हिंसा को रोकना है बल्कि विकास के माध्यम से क्षेत्र को स्थायी रूप से मजबूत बनाना भी है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ सीधे आदिवासियों तक पहुंचाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की मुख्य योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रशासन की गतिविधियों के माध्यम से हिंसा को नियंत्रित किया जा रहा है और साथ ही विकास कार्यों में तेजी लाई जा रही है। अमित शाह ने आदिवासी नेताओं और जनता को आश्वासन दिया कि विकास और सुरक्षा में सामंजस्य बनाकर बस्तर को पहले से अधिक समृद्ध और सुरक्षित बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग वर्षों से उपेक्षा और हिंसा का सामना कर रहे थे, लेकिन अब सरकार ने उनके कल्याण के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
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