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अमित शाह और सीएम धामी ने की मां गंगा की आराधना
Uttarakhand उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस के शताब्दी समारोह से पहले उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गीता भवन स्थित गंगा घाट पर विधिवत गंगा आरती की और मां गंगा की पूजा-अर्चना कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। गंगा आरती से पहले अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गीता प्रेस आश्रम में कुछ समय बिताया और वहां की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखा। गीता प्रेस आश्रम में संतों और ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया और गीता प्रेस की 100 वर्षों की यात्रा, उसके उद्देश्यों और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में उसके योगदान की जानकारी दी।
गंगा आरती के दौरान पूरे घाट पर भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और दीपों की रोशनी के बीच अमित शाह और पुष्कर सिंह धामी ने मां गंगा की आराधना की। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त फोर्स तैनात रही ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। गीता प्रेस गोरखपुर की स्थापना वर्ष 1923 में हुई थी और यह संस्था पिछले एक शताब्दी से सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभा रही है। गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथ देश-विदेश में करोड़ों लोगों तक पहुंचे हैं। गीता प्रेस का शताब्दी समारोह इसी गौरवशाली यात्रा का प्रतीक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि गीता प्रेस न केवल एक प्रकाशन संस्थान है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का जीवंत केंद्र है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां गीता प्रेस के शताब्दी समारोह से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन होना राज्य के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गीता प्रेस के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्था ने देश को सांस्कृतिक रूप से एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस ने बिना किसी व्यावसायिक लाभ के सनातन साहित्य को आम जन तक पहुंचाया, जो अपने आप में एक अद्वितीय उदाहरण है।
कार्यक्रम के दौरान संत समाज और गीता प्रेस से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस की शिक्षाएं आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी 100 साल पहले थीं। गीता प्रेस शताब्दी समारोह को लेकर हरिद्वार समेत पूरे उत्तराखंड में उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में देश के कई प्रमुख नेता, संत और विचारक इस समारोह में हिस्सा लेंगे। गंगा आरती और पूजा-अर्चना के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन की आध्यात्मिक शुरुआत मानी जा रही है।
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