अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर बनी सहमति, होर्मुज को खोलने और नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का निर्णय

बड़ी खबर. अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है, जिस पर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. बताया जा रहा है कि इसके बाद तेहरान परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत चर्चा का दौर चलेगा. पीस डील का ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूएस-ईरान के बीच पीस डील पूरी हो चुकी है. ऐसे में अब मैं होर्मुज को टोल-फ्री खोलने और नौसैनिक ब्लॉकेड हटाने की मंजूरी देता हूं.
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय ने आधिकारिक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि शहीद नेता की अगुवाई में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने अमेरिकी-जियोनिस्ट दुश्मन पर अपनी श्रेष्ठता साबित की है. सुप्रीम लीडर (ईरानी नेता) के मार्गदर्शन में, पूरे राष्ट्र के समर्थन और इस्लाम के योद्धाओं के प्रयासों से कई महीनों की कठिन और गहन वार्ताओं (इस्लामाबाद वार्ता) के बाद 14 जून की शाम को अमेरिका के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का मसौदा अंतिम रूप दे दिया गया.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अपने बयान में कहा कि हुए समझौतों के अनुसार, लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियान आज रात से ही तुरंत और हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे और इसके अलावा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत और पूरी तरह से हटा ली जाएगी. इस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक तौर पर शुक्रवार, 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे. सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने ये भी कहा कि अंतिम समझौते के लिए बातचीत तब तक टाल दी जाएगी, जब तक कि दूसरी पार्टी (अमेरिका) समझौता ज्ञापन के अनुसार, अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर लेती. बयान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, पाकिस्तान और कतर सरकार के प्रयासों की भी सराहना की गई है.
UN महासचिव ने खुशी जताते हुए कहा, 'मैं अमेरिका और ईरान को शांति समझौते पर पहुँचने के लिए बधाई देता हूं. इस समझौते में तुरंत और स्थायी युद्धविराम, होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की व्यवस्था है. ये संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.' उन्होंने आगे कहा कि मैं पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और क्षेत्र के अन्य देशों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने शांति समझौते तक दोनों देशों के पहुंचाने वाली बातचीत का समर्थन करने में खास भूमिका निभाई है.





