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बिलासपुर। रीढ़ की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में अब स्पाइन से संबंधित जटिल रोगों के आधुनिक उपचार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एम्स प्रशासन ने एंडोस्कोपी स्पाइन सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। इस अत्याधुनिक तकनीक के स्थापित होने से स्पाइन डिस्क, नसों पर दबाव, स्लिप डिस्क, कमर एवं गर्दन दर्द जैसी समस्याओं का इलाज कम चीरे वाली सर्जरी के माध्यम से संभव हो सकेगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए चंडीगढ़ दिल्ली या अन्य बड़े मेडिकल संस्थानों का रुख नहीं करना पड़ेगा। एंडोस्कोपी स्पाइन सिस्टम आधुनिक कैमरा तकनीक और विशेष सर्जिकल उपकरणों से लैस होगा, जिससे सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी हो सकेगी। इस तकनीक के जरिए आपरेशन के बाद दर्द कम होगा, रक्तस्राव न्यूनतम रहेगा और मरीज की रिकवरी तेजी से होगी। कई मामलों में मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य जीवन में लौट सकेगा।
अब तक स्पाइन से गंभीर रूप से पीडि़त मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। एंडोस्कोपी स्पाइन सिस्टम की स्थापना से हिमाचल प्रदेश सहित आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। एम्स बिलासपुर में नित नई नई टेक्रोलॉजी का विस्तार हो रहा है। मरीजों को एम्स में ही हर प्रकार के इलाज की सहूलियत उपलब्ध करवाई जा रही है। आने वाले समय में यह स्वास्थ्य संस्थान तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और मरीजों को इलाज के लिए अन्य जगहों का रुख नहीं करना पड़ेगा। एम्स बिलासपुर प्रशासन का कहना है कि यह पहल संस्थान की चिकित्सा सेवाओं को और सुदृढ़ करेगी तथा ऑर्थोपेडिक्स और न्यूरो-स्पाइन विभाग को तकनीकी रूप से नई मजबूती प्रदान करेगी।
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