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पालम अग्निकांड शोक सभा में AAP और बीजेपी नेताओं के बीच हाथापाई
Shantanu Roy
19 March 2026 6:17 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। दिल्ली के पालम इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद गुरुवार को शोक सभा के दौरान AAP और बीजेपी नेताओं के बीच कहासुनी और हाथापाई का मामला सामने आया। इस घटना ने मौके पर तनाव और अफरा-तफरी पैदा कर दी। पालम अग्निकांड के बाद लगातार अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल शाम पांच बजे पीड़ित परिवार से मुलाकात करने वाले थे। लेकिन उनके आने से पहले ही AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, कई पार्षद, विधायक और अन्य नेता शोक सभा में मौजूद हो गए।
सूत्रों के अनुसार, जब AAP नेता शोक सभा में बैठे थे, तभी बीजेपी विधायक कुलदीप सोलंकी मौके पर पहुंचे। इसी दौरान सौरभ भारद्वाज ने विधायक को अपने मोबाइल में एक वीडियो दिखाया, जिसमें बचाव कार्य के दौरान हाइड्रोलिक मशीन फेल होती दिख रही थी। भारद्वाज ने इस विफलता के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया। इसके बाद दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। कुछ ही क्षणों में यह बहस गाली-गलौज और धक्का-मुक्की में बदल गई। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच जबरदस्त हंगामा देखने को मिला।
शोक सभा का गरिमापूर्ण माहौल पूरी तरह भंग हो गया और पुलिस को मौके पर आकर स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तत्परता दिखाई गई और हालात को शांत कराया गया। इस घटना ने राजनीतिक वातावरण को भी गर्मा दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें दोनों दलों के नेताओं के बीच झड़प साफ देखी जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल शोक सभा का उद्देश्य प्रभावित होता है, बल्कि राजनीतिक तनाव भी बढ़ता है।
पीड़ित परिवार को शांति और राहत देने की बजाय यह झड़प मीडिया और जनता के लिए चिंता का विषय बन गई है। प्रशासन ने सभी राजनीतिक नेताओं से अपील की है कि वे संवेदनशील परिस्थितियों में संयम बनाए रखें और पीड़ित परिवार के प्रति सम्मान दिखाएं। यह मामला यह भी रेखांकित करता है कि दिल्ली में राजनीतिक दल कभी-कभी संवेदनशील परिस्थितियों में भी राजनीतिक लाभ के लिए कार्य कर सकते हैं, जिससे शोक और पीड़ा के माहौल में और तनाव उत्पन्न होता है।
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