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सिवनी में 40 फीट गहरा निर्माणाधीन कुआं धंसा, , मां-बेटी मलबे में दबीं
Tara Tandi
1 Jun 2026 10:30 PM IST

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MP मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बंडोल थाना क्षेत्र के दुकली गांव में निर्माणाधीन कुएं के अचानक धंस जाने से एक ही परिवार की तीन महिलाएं मलबे में दब गईं। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंच गई।
जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित दुकली गांव में एक निजी खेत में करीब 40 फीट गहरे कुएं का निर्माण कार्य चल रहा था। कुएं में हाल ही में कंक्रीट का काम किया गया था। सोमवार दोपहर समनिया बाई जंघेला (75), उनकी बेटी अनुसूईया जंघेला (42) और नातिन स्वाति जंघेला (17) कुएं के आसपास कंक्रीट की तराई कर रही थीं। इसी दौरान अचानक कुएं का एक हिस्सा भरभराकर धंस गया।
हादसा इतना अचानक हुआ कि तीनों महिलाएं संभल भी नहीं सकीं और मलबे के साथ कुएं में जा गिरीं। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और राहत कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद बुजुर्ग समनिया बाई को रस्सियों की मदद से बाहर निकाला गया। उनका शरीर आंशिक रूप से मलबे में दबा हुआ था और वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें तत्काल एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
हालांकि अनुसूईया जंघेला और उनकी बेटी स्वाति अब भी मलबे में फंसी हुई बताई गईं। घटना के बाद पूरे गांव में चिंता और बेचैनी का माहौल बन गया। परिवार के सदस्य और ग्रामीण लगातार रेस्क्यू अभियान पर नजर बनाए हुए हैं और दोनों को सुरक्षित निकालने की उम्मीद कर रहे हैं।
सूचना मिलते ही कलेक्टर अनिल कुमार राठौर, पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी, एसडीओपी सचिन परते समेत प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस बल और बचाव दल ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। कुएं की गहराई और भारी मात्रा में गिरे मलबे के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि कुएं में कुछ मात्रा में पानी भी मौजूद है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन और कठिन हो गया है। मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद ली जा रही है। मौके पर पहले रैम्प तैयार किया गया ताकि मशीनें सुरक्षित तरीके से कुएं के नजदीक पहुंच सकें। इसके अलावा पोकलेन मशीन और अन्य भारी उपकरण भी बुलाए गए हैं ताकि तेजी से मलबा हटाया जा सके।
घटना के बाद कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने रेस्क्यू टीम के देर से पहुंचने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सूचना मिलने के बाद राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू होना चाहिए था। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सूचना मिलते ही सभी संबंधित विभागों को सक्रिय कर दिया गया था और पूरी क्षमता के साथ बचाव कार्य किया जा रहा है।
इस हादसे ने निर्माणाधीन कुओं और अन्य संरचनाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
फिलहाल प्रशासन की पूरी प्राथमिकता मलबे में फंसी मां-बेटी को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। पूरे जिले की नजर इस रेस्क्यू अभियान पर टिकी हुई है और लोग दोनों महिलाओं की सलामती की दुआ कर रहे हैं। यह हादसा गांव के लोगों के लिए एक बड़ा सदमा बन गया है और पूरे क्षेत्र में शोक व चिंता का माहौल बना हुआ है।
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