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Shimla. शिमला। आखिरकार राज्य के तीन बड़े अस्पतालों को हिमकेयर योजना के तहत लंबित पड़े भुगतान को करने के लिए 43.19 करोड़ जारी हो गए हैं। स्वास्थ्य सचिव की ओर से यह पैसा निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को ट्रांसफर हो गया है, जहां से यह चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी को जाएगा। इस बारे में घोषणा पहले हो गई थी, लेकिन वित्तीय औपचारिकताएं पूरा करने में काफी वक्त लग गया। इस आबंटन के अनुसार आईजीएमसी शिमला को 15 करोड़, टांडा मेडिकल कॉलेज को 15 करोड़ और पीजीआई चंडीगढ़ को 13.19 करोड रुपए जारी किए गए हैं। इन मेडिकल कॉलेजों को यह पैसा मिलने के बाद हिमकेयर का लंबित भुगतान करने में मदद मिलेगी। हालांकि आईजीएमसी और टांडा में पिछला भुगतान काफी ज्यादा है और इस योजना के तहत अब तक सरकार को 400 करोड़ से ज्यादा की राशि चुकानी है।
दूसरी तरफ हिमकेयर और आयुष्मान योजना में किडनी के मरीजों का डायलिसिस करने वाले प्राइवेट केंद्रों का भुगतान करीब डेढ़ साल से नहीं हुआ है। इसके लिए यह भी आजकल सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को हिमाचल वैली अस्पताल नेरचौक और करसोग क्षेत्र के कुछ निजी केंद्रों ने राजभवन जाकर राज्यपाल को भी एक ज्ञापन दिया है। इसमें यह आग्रह किया गया है कि इन प्राइवेट केंद्रों का लाखों रुपए का भुगतान लंबित हो गया है, जिस कारण अब इन्हें इस सुविधा को आगे चलाना मुश्किल हो रहा है। निजी केंद्रों के संचालक स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल से मिलने आए थे, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। राज्य सरकार ने निजी केंद्रों में डायलिसिस की अनुमति दे रखी है और प्रति मरीज प्रति डायलिसिस 1500 रुपए का भुगतान हिमकेयर के तहत राज्य सरकार करती है। अब क्योंकि तीन बड़े मेडिकल कॉलेजों को हिम केयर में कुछ धनराशि मिली है, इसलिए इन्हें भी अब भुगतान होने की उम्मीद है।
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