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Nahan. नाहन। जिला में कई विद्यालय शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के निर्धारित मानकों का पालन नही कर रहे हैं। हालत यह है कि जिला में 19 प्रतिशत विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग शौचालय नही है। जबकि 11 प्रतिशत विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन व 33 प्रतिशत को आत्मरक्षा अनुदान नही मिला है। यह खुलासा गुरुवार को नाहन में आयोजित शिक्षा विभाग की सोशल ऑडिट के दौरान आयोजित जिला स्तरीय बैठक में हुआ। समग्र शिक्षा अभियान के तहत योजनाओं की जमीनी हकीकत क्या है के लिए शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के तहत प्रदेश विश्वविद्यालय के तहत हिमाचल प्रदेश के जिलों में सामाजिक अंकेक्षण अथवा सोशल ऑडिट अमलीजामा पहनाया गया है। इस कड़ी में जिला सिरमौर में भी गुरूवार को सोशल ऑडिट के तहत जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें जिला सिरमौर के 300 के लगभग स्कूलों के 700 के करीब शिक्षकों ने हिस्सा लिया। जनसुनवाई में इस दौरान सोशल ऑडिट टीम के प्रिंसीपल इंवेस्टिगेटर डाक्टर रणधीर सिंह रांटा, समन्वयक अश्वनी ठाकुर, उपनिदेशक उच्च शिक्षा सिरमौर राजेश कुमार, उपनिदेशक प्रारभिंक शिक्षा सिरमौर राजीव ठाकुर, उपनिदेशक क्वालिटी कंट्रोल व जिला परियोजना अधिकारी सीमा धीमान मौजूद रहे।
जनसुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि, जिला सिरमौर के 43 प्रतिशत विद्यालयों में पर्याप्त क्लास रूम नही हैं। दो प्रतिशत विद्यालयों में मध्यांरत भोजन के लिए रसोई घर उपलब्ध नही है। ऑडिट में खुलासा हुआ है कि जिला सिरमौर में 21 प्रतिशत विद्यालयों में दिव्यांगजनों के लिए बैरियर फ्री सुविधा नही है। 52 फीसदी में यह सुविधा आंशिक ही है। सोशल ऑडिट के तहत जिला सिरमौर में 81 प्रतिशत विद्यालयों में पानी की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण नही होता है। दो प्रतिशत विद्यालय आज भी ऐसे हैं जहां बिजली भी नही है। 18 प्रतिशत विद्यालयों में खेल मैदान नही हैं। ऐसे में बच्चे खिलाड़ी कैसे बन पाएंगे। 99 प्रतिशत विद्यालयों में पुस्तकालयों में पत्रिकाओं, व 93 प्रतिशत में समाचार पत्रों की सदस्यता नही है। 21 प्रतिशत विद्यालयों में प्रयोगशालाएं नही हैं। ऐसे में छात्र कैसे प्रयोग करेंगे। 30 प्रतिशत विद्यालयों में साइंस व मैथ की किट ही नहीं हैं। 99 प्रतिशत स्कूलों में विशेष शिक्षक नही हैं। किसी भी विद्यालय में काउसंलर नियुक्त नही हैं। चार प्रतिशत स्कूलों में बालिका शौचालय अलग नही हैं। उपनिदेशक सीमा धीमान व राजीव ठाकुर ने बताया कि जन सुनवाई का लक्ष्य प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों को के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता, व बालिकाओं की सुरक्षा में प्रभावी सुधार सुनिश्चित करना है।
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